JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बावजूद जम्मू जिले के आरएसपुरा सेक्टर में खेतों से बार-बार हेरोइन के पैकेट बरामद होने की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं। सीमावर्ती इलाकों में नशीले पदार्थों की लगातार बरामदगी से यह सवाल उठने लगा है कि सीमा पार से ड्रोन के जरिए भेजी जा रही खेप भारतीय क्षेत्र में कई किलोमीटर अंदर तक कैसे पहुंच रही है। साथ ही, इन खेपों को प्राप्त करने वाले लोगों और उनके पीछे सक्रिय तस्करी के नेटवर्क की पहचान करना भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
ताजा मामला मंगलवार रात गांव मुले चक तलाड़ के पास का है, जहां धान के खेत से हेरोइन के तीन पैकेट बरामद किए गए। बताया जा रहा है कि जिस स्थान से यह खेप मिली, वह अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग चार से पांच किलोमीटर अंदर स्थित है। इस बरामदगी ने एक बार फिर सीमावर्ती क्षेत्र में ड्रोन के संभावित इस्तेमाल और नशे की तस्करी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, इस मामले में खेप को ड्रोन से गिराए जाने और अलग-अलग बरामदगी की घटनाओं के बीच किसी साझा नेटवर्क के सक्रिय होने की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। इसके बावजूद लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी निगरानी और स्थानीय स्तर पर तस्करी के नेटवर्क की पहचान करने की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।
सीमा से दूर खेतों तक कैसे पहुंच रही नशे की खेप?
आरएसपुरा सेक्टर में सामने आई ताजा घटना का सबसे अहम पहलू बरामदगी का स्थान है। यदि सीमा पार से ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थ भेजे जाने की आशंका सही साबित होती है, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि ऐसी गतिविधियों को समय रहते पहचानने में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी रखती हैं, लेकिन ड्रोन के संभावित इस्तेमाल से नशीले पदार्थों की तस्करी का तरीका जटिल हो सकता है। ऐसे मामलों में केवल संदिग्ध गतिविधि का पता लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बरामद खेप के स्रोत, उसे भेजने वालों और भारतीय क्षेत्र में उसे प्राप्त करने वाले संभावित लोगों की पहचान करना भी महत्वपूर्ण है।
मुले चक तलाड़ के पास खेत से तीन पैकेट मिलने के बाद यह जानना भी जांच का विषय है कि क्या खेप को किसी विशेष स्थान पर गिराया गया था और क्या उसे उठाने के लिए कोई व्यक्ति वहां पहुंचने वाला था। फिलहाल इन संभावनाओं को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
पहले भी सामने आ चुकी हैं हेरोइन बरामदगी की घटनाएं
आरएसपुरा और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में इससे पहले भी खेतों तथा कृषि भूमि से नशीले पदार्थों की खेप मिलने के मामले सामने आ चुके हैं। इन घटनाओं में ड्रोन के जरिए खेप गिराए जाने की आशंका भी जताई गई थी।
27 अक्टूबर 2025: आरएसपुरा सेक्टर में बीओपी जतिंदर के पास सीमा सुरक्षा बल और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान दो बैगों से लगभग 5.3 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई थी। उस समय भी सीमा पार से ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थ पहुंचाए जाने की आशंका व्यक्त की गई थी।
14 फरवरी 2026: नई बस्ती करोटाना क्षेत्र में गेहूं के खेत से दो पैकेट बरामद किए गए थे। इनमें लगभग 6.582 किलोग्राम हेरोइन जैसी सामग्री होने की जानकारी सामने आई थी। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 40 करोड़ रुपये बताई गई थी। अधिकारियों ने इस खेप के ड्रोन से गिराए जाने की आशंका जताई थी।
14 मार्च 2026: आरएसपुरा सेक्टर में फ्लोरा और सुचेतगढ़ के बीच कृषि भूमि से लगभग 503 ग्राम हेरोइन बरामद होने की सूचना सामने आई थी। इस घटना ने भी सीमावर्ती इलाकों में नशीले पदार्थों की तस्करी को लेकर चिंता बढ़ाई थी।
अब मुले चक तलाड़ के पास धान के खेत से तीन पैकेट मिलने की घटना ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, इन सभी मामलों का आपस में संबंध है या नहीं, यह संबंधित जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।
केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी से नहीं रुकेगी तस्करी
नशे की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई में बरामदगी एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके साथ पूरे नेटवर्क की पहचान करना भी आवश्यक है। जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती रहती है कि खेप कहां से भेजी गई, इसे भारतीय क्षेत्र में किसने प्राप्त किया और क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है।
यदि किसी खेप को प्राप्त करने के लिए स्थानीय स्तर पर पहले से संपर्क या व्यवस्था मौजूद हो, तो तस्करी के नेटवर्क तक पहुंचने में ऐसे संपर्क महत्वपूर्ण सुराग साबित हो सकते हैं। हालांकि, किसी भी व्यक्ति या समूह की भूमिका जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर ही तय की जा सकती है।
ऐसे मामलों में बरामदगी के स्थान, पैकेटों की प्रकृति, उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों और अन्य संबंधित जानकारियों का विश्लेषण तस्करी के तरीके को समझने में मदद कर सकता है। इससे यह भी पता लगाने में सहायता मिल सकती है कि अलग-अलग घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ी हैं या इनके पीछे अलग-अलग लोग सक्रिय हैं।
सीमावर्ती गांवों में निगरानी और खुफिया तंत्र मजबूत करना जरूरी
आरएसपुरा सेक्टर में बार-बार सामने आ रही घटनाओं के मद्देनजर सीमावर्ती गांवों और कृषि क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता की समीक्षा महत्वपूर्ण हो सकती है। संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों की समय पर पहचान, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं का बेहतर आदान-प्रदान तथा स्थानीय स्तर पर मिलने वाले सुरागों पर समयबद्ध कार्रवाई ऐसे मामलों की जांच में सहायक हो सकती है।
इसके साथ ही, नशीले पदार्थों की खेप प्राप्त करने वाले संभावित लोगों की पहचान और तस्करी से जुड़े आर्थिक तथा संपर्क संबंधी पहलुओं की जांच भी महत्वपूर्ण है। यदि किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका सामने आती है, तो उसके अन्य सदस्यों तक पहुंचना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाना जांच का अहम हिस्सा होगा।
नशे की तस्करी पर रोक लगाना सबसे बड़ी चुनौती
सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी केवल सुरक्षा व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि इसका असर युवाओं और समाज पर भी पड़ता है। हेरोइन जैसे नशीले पदार्थों की आपूर्ति रोकने के लिए तस्करी के स्रोत से लेकर स्थानीय स्तर पर खेप प्राप्त करने वालों तक पूरे नेटवर्क को समझना जरूरी है।
आरएसपुरा के सीमांत क्षेत्र में लगातार सामने आ रही बरामदगी की घटनाओं के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन खेपों के पीछे सक्रिय लोगों की पहचान कितनी प्रभावी ढंग से हो पाती है और संदिग्ध गतिविधियों को समय रहते रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को किस तरह मजबूत किया जाता है।
मुले चक तलाड़ के पास हुई ताजा बरामदगी ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि नशे की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई में केवल खेप बरामद करना ही नहीं, बल्कि उसके स्रोत और पूरे नेटवर्क तक पहुंचना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जांच के निष्कर्ष ही यह स्पष्ट कर पाएंगे कि इन घटनाओं के पीछे कौन सक्रिय है और सीमा से कई किलोमीटर अंदर तक नशीले पदार्थों की खेप पहुंचने के मामलों को रोकने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाने की जरूरत है।


