JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू
नेपाल में अचानक आई भयंकर बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा को जानकारी देते हुए बताया कि रसुवा में पैदा हुई आपदा के पीछे सुबह आए भूकंप के साथ हुए हिमस्खलन की भूमिका सामने आई है, जिसकी आगे पुष्टि की जा रही है।
विदेश मंत्री के मुताबिक, सुबह करीब 8:37 बजे भूकंप आया और इसके कुछ ही मिनट बाद, करीब 8:40 बजे रसुवा में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। देखते ही देखते भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में बाढ़ आ गई, जिससे रसुवा और नुवाकोट जिलों के कई इलाके प्रभावित हुए।
तिमुरे, स्याफ़रुबेसी, बेत्रावती, त्रिशूली बाजार और देवीघाट समेत कई क्षेत्रों में भारी नुकसान की खबर है। नदियों के किनारे रहने वाले लोगों के लिए अभी भी खतरा बना हुआ है और प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी है।
त्रिशूली बाजार में मची अफरा-तफरी
त्रिशूली बाजार में बाढ़ की स्थिति बेहद भयावह रही। स्थानीय वार्ड अध्यक्ष रंजित के अनुसार, निचले बाजार के लोगों ने समय रहते इलाका खाली कर दिया था, लेकिन ऊपरी बाजार में कई लोग मौजूद थे।
उन्होंने बताया कि जब त्रिशूली नदी का पुराना पुल बाढ़ की चपेट में आया, तब वह माइक के जरिए लोगों को लगातार चेतावनी दे रहे थे। नए पुल की ओर पहुंचते-पहुंचते पानी उनके पैरों तक आ गया और उन्होंने चट्टानों तक पहुंचकर किसी तरह अपनी जान बचाई।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ लोगों ने बाढ़ की चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया, क्योंकि पहले भी ऐसी अफवाहें सामने आती रही थीं, लेकिन इस बार नदी का पानी बेहद तेजी से बढ़ा और हालात नियंत्रण से बाहर हो गए।
अधिकारियों के अनुसार, ऐतिहासिक त्रिशूली बाजार को ‘संगुबाजार’ के नाम से भी जाना जाता है। यहां करीब 500 घर हैं और आबादी 2,000 से अधिक बताई जाती है।
1985 में भी आया था बड़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, वर्ष 1985 में रसुवा के धुन्चे इलाके में भूस्खलन के कारण त्रिशूली नदी का रास्ता अवरुद्ध हुआ था। उस समय भी बाजार को बाढ़ की आशंका के चलते खाली कराया गया था, हालांकि उस दौरान बाढ़ बाजार तक नहीं पहुंची थी।
इस बार भूकंप, हिमस्खलन और अचानक बढ़े नदी के जलस्तर ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।
भारत और चीन से मदद की तैयारी
नेपाल सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के लिए भारत और चीन से भी संपर्क किया है। सरकारी प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने बताया कि दोनों देशों के साथ आवश्यक सहायता को लेकर बातचीत जारी है और विदेश मंत्रालय के माध्यम से समन्वय किया जा रहा है।
नेपाल सरकार ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी क्षेत्र में बचाव के लिए हेलीकॉप्टर की आवश्यकता हो तो आपातकालीन सहायता नंबर 1234 पर संपर्क किया जाए।
पीएम मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से की बात
नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात की। पीएम मोदी ने नेपाल में हुई जनहानि पर संवेदना जताई और कहा कि भारत इस मुश्किल समय में नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है।
भारत ने नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने की तैयारी जताई है और राहत एवं बचाव कार्यों में नेपाल के अधिकारियों के साथ सहयोग की बात कही है।
फिलहाल भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के आसपास के इलाकों में खतरा बना हुआ है। प्रशासन की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, लापता लोगों की तलाश करने और प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने की है।


