Wednesday, October 7, 2026
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लगातार 25 साल की चुनावी सफलता पर उमर ने PM मोदी को दी बधाई, SIR को लेकर जताई चिंता

JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उन्हें बधाई दी। उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री के लंबे राजनीतिक सफर और लगातार चुनावी सफलताओं का जिक्र करते हुए कहा कि 25 वर्षों तक लगातार चुनाव जीतना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने निश्चित रूप से ऐसा कुछ किया होगा, जिसके कारण लोगों ने उन्हें बार-बार अपना समर्थन दिया।

श्रीनगर में मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के 25 वर्ष के राजनीतिक जीवन का आकलन करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले राज्य स्तर पर और उसके बाद केंद्र स्तर पर लगातार चुनावी सफलता हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।

उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री को बधाई देते हुए कहा कि वह अपनी ओर से और अपने सहयोगियों की ओर से नरेंद्र मोदी को उनके राजनीतिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर शुभकामनाएं देते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक गुजरात की राजनीति में नेतृत्व किया और मई 2014 में देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला। इसके बाद वह लगातार देश के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं।

SIR को लेकर उमर ने जताई चिंता

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में प्रस्तावित मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका इस्तेमाल किसी भी तरह से चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए नहीं होना चाहिए।

उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि देश के कुछ हिस्सों में SIR को चुनावी प्रक्रिया में दखल के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की आशंका है। उन्होंने कहा कि उन्हें चिंता है कि जम्मू-कश्मीर में भी ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर पहले भी परिसीमन जैसी प्रक्रिया का सामना कर चुका है और इस मुद्दे को भुलाया नहीं जा सकता। उमर ने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर में हुए परिसीमन से भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया था। उन्होंने आशंका जताई कि SIR को लेकर भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिल सकती है।

परिसीमन के बाद बढ़ी थीं विधानसभा सीटें

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों से पहले परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की गई थी। इसके बाद विधानसभा सीटों की संख्या 83 से बढ़कर 90 हो गई। परिसीमन के बाद जम्मू संभाग में विधानसभा सीटों की संख्या 37 से बढ़कर 43 हुई, जबकि कश्मीर संभाग में सीटों की संख्या 46 से बढ़कर 47 हो गई।

उमर अब्दुल्ला ने इसी परिसीमन का हवाला देते हुए SIR को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रहना जरूरी है और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के राजनीतिक सफर पर उमर अब्दुल्ला की टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब जम्मू-कश्मीर में मतदाता सूची के प्रस्तावित विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो रही है।

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