JNM पत्रकार हरदीप जमवाल जम्मू
जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा (स्टेटहुड) बहाल करने की मांग एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) ने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। इस प्रदर्शन में देशभर के 52 राजनीतिक और धार्मिक संगठनों के नेताओं को आमंत्रित किया गया है। इतना ही नहीं, एनसी ने बीजेपी की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष सत शर्मा को भी प्रदर्शन में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है।
हालांकि, इस प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सियासत तेज हो गई है। बीजेपी ने इसे जनता का ध्यान सरकार की कथित नाकामियों से हटाने की कोशिश बताया है।
आखिर एनसी स्टेटहुड क्यों चाहती है?
नेशनल कॉन्फ्रेंस का कहना है कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने और जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा समाप्त कर उसे केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद प्रदेश के अधिकार सीमित हो गए। एनसी का दावा है कि पूर्ण राज्य बनने से जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के पास अधिक प्रशासनिक और संवैधानिक अधिकार होंगे, जिससे विकास कार्यों में तेजी आएगी और जनता की समस्याओं का समाधान बेहतर ढंग से हो सकेगा।
पार्टी का यह भी कहना है कि राज्य का दर्जा बहाल करना केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं से जुड़ा विषय है। इसी मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है।
बीजेपी का पलटवार
बीजेपी के जम्मू-कश्मीर प्रभारी तरुण चुग ने एनसी के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह केवल जनता का ध्यान भटकाने और अपनी विफलताओं को छिपाने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने चुनावी घोषणापत्र में किए गए कई वादे पूरे नहीं किए और अब स्टेटहुड के मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है।
तरुण चुग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में शांति, पर्यटन, विकास और पारदर्शिता का नया दौर शुरू हुआ है तथा कुछ राजनीतिक दल इस माहौल को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने भी साधा निशाना
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने भी एनसी के प्रस्तावित प्रदर्शन को महज दिखावा बताया। उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने का फैसला संसद के माध्यम से होगा, न कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने से। उन्होंने साफ किया कि बीजेपी इस प्रदर्शन में शामिल नहीं होगी और एनसी जनता को राजनीतिक मुद्दों के जरिए गुमराह करने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा प्रदर्शन
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 20 जुलाई का प्रदर्शन केवल एक विरोध कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्टेटहुड के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।


