JNM | संवाददाता,जम्मू
उधमपुर की अदालत ने 12 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म के दोषी मोहम्मद अरशद उर्फ निक्का को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। पॉक्सो एक्ट के तहत सुनाए गए इस फैसले को न्यायपालिका की “जीरो टॉलरेंस टू चाइल्ड क्राइम” नीति का मजबूत संदेश माना जा रहा है।

41 वर्षीय दोषी अरशद, जो उधमपुर के चनेनी क्षेत्र में रह रहा था, को पचास हजार रुपये जुर्माना भी देना होगा। अदालत ने साफ कहा कि यह राशि पीड़िता के पुनर्वास और मानसिक पुनर्निर्माण के लिए उपयोग की जाएगी।
कैसे सामने आया मामला
यह मामला जुलाई 2020 में तब सामने आया जब पीड़िता की मां ने रामनगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि उनकी बेटी खेत में नाशपती तोड़ने गई थी, जहां आरोपी ने उसका शोषण किया।
पुलिस जांच में मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान निर्णायक साबित हुए। रिपोर्ट में बच्ची की उम्र 11 वर्ष बताई गई थी। हालांकि पूर्ण दुष्कर्म के संकेत नहीं मिले, लेकिन परिस्थितिजन्य साक्ष्य ने अपराध की पुष्टि की।
न्यायालय की टिप्पणी
मुख्य सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह भाऊ ने सजा सुनाते हुए कहा “यह अपराध न केवल एक बच्ची के शरीर पर, बल्कि समाज की आत्मा पर चोट करता है। अदालत का कर्तव्य है कि ऐसे मामलों में स्पष्ट संदेश जाए कि मासूमों की सुरक्षा सर्वोपरि है।”
उन्होंने कहा कि अभियुक्त की उम्र और पारिवारिक स्थिति को देखते हुए भी नरमी की कोई गुंजाइश नहीं थी।
पीड़िता के लिए मुआवजा और सहारा
न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी को निर्देश दिया कि पीड़िता को मुआवजा योजना के तहत सहायता प्रदान की जाए, ताकि उसका पुनर्वास सुनिश्चित हो सके।
यह फैसला न सिर्फ उधमपुर बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर के लिए एक चेतावनी की तरह है कि बाल शोषण जैसे अपराधों के लिए अब कोई सहानुभूति नहीं बचेगी। अदालत ने यह भी कहा कि “निवारण तभी संभव है जब दंड सुनिश्चित और कठोर हो।”

