JNM संवाददाता हरदीप जमवाल श्रीनगर, 04 नवंबर 2025
जम्मू और कश्मीर की अदालत ने सेवाकाल को अवैध रूप से बढ़ाने के लिए अपनी जन्मतिथि में धोखाधड़ी करने के एक बड़े मामले में, जे-के कोऑपरेटिव सेंट्रल लैंड डेवलपमेंट लिमिटेड के 93 वर्षीय पूर्व प्रबंध निदेशक (MD) मोहम्मद शफी बंदे को दोषी ठहराया है। अदालत ने इस गंभीर वित्तीय फर्जीवाड़े के लिए उन्हें दो साल की सादी जेल और जुर्माने की सज़ा सुनाई है।
जन्मदिन की धोखाधड़ी का खुलासा
आर्थिक अपराध विंग (EOW), क्राइम ब्रांच कश्मीर की गहन जांच के बाद यह पूरा मामला सामने आया। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बंदे ने अपनी वास्तविक सेवानिवृत्ति को टालने के उद्देश्य से अपनी जन्मतिथि में हेरफेर किया।
जांच में यह पुष्टि हुई कि आरोपी की वास्तविक जन्मतिथि 26 जून 1932 थी, लेकिन उन्होंने अपनी सर्विस रिकॉर्ड में जानबूझकर इसे 1 सितंबर 1939 दर्ज कराया और फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए। रिकॉर्ड में हेरफेर से पता चला कि उन्होंने जन्मतिथि को लगभग सात साल से भी अधिक पीछे धकेल दिया था|

राज्य को हुआ भारी वित्तीय नुकसान
क्राइम ब्रांच की जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस आपराधिक फर्जीवाड़े के कारण मोहम्मद शफी बंदे ने अपने सेवा कार्यकाल को अवैध रूप से सात साल से अधिक समय तक बढ़ाया, जिससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से लाभ हुआ और राज्य के खजाने को भारी वित्तीय हानि हुई।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद मोहम्मद शफी बंदे को दोषी पाया। कोर्ट ने इस अपराध के लिए उन्हें प्रत्येक मामले में दो साल की सादी जेल और 5,000 रुपये जुर्माने की सज़ा सुनाई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी सज़ाएं एक साथ चलेंगी।
सरकारी सेवा में जन्मतिथि के फर्जीवाड़े का यह मामला दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में न्याय भले ही देर से मिले, लेकिन मिलता ज़रूर है। 93 वर्ष की आयु में पूर्व MD को सज़ा मिलना, सरकारी पदों पर बैठे उन सभी लोगों के लिए एक सख़्त संदेश है जो नियमों का उल्लंघन कर व्यक्तिगत लाभ उठाने का प्रयास करते हैं।

