JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल,जम्मू
जम्मू-कश्मीर में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर सामने आए आंकड़ों ने शिक्षा व्यवस्था की बुनियाद पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले करीब 62 प्रतिशत बच्चे दूसरी कक्षा के स्तर की पुस्तक भी नहीं पढ़ पा रहे हैं। सरकारी स्कूलों की स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां पांचवीं कक्षा के केवल 21.8 प्रतिशत विद्यार्थी ही दूसरी कक्षा के स्तर का पाठ पढ़ने में सक्षम पाए गए। वहीं, निजी स्कूलों में यह आंकड़ा 60.3 प्रतिशत दर्ज किया गया है। सरकारी और निजी स्कूलों के बीच सीखने के स्तर का अंतर 38.5 प्रतिशत अंक है।
ये आंकड़े राजीव गांधी इंस्टीट्यूट फॉर कंटेम्परेरी स्टडीज (आरजीआईसीएस) की रिपोर्ट ‘ए न्यू विजन फॉर जेएंडके एंड ए न्यू स्ट्रेटजी फॉर रियलाइजिंग दैट विजन’ में सामने आए हैं। रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के सामाजिक विकास और शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों का आकलन करते हुए वर्ष 2024 की शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट (एएसईआर) के आंकड़ों को आधार बनाया गया है। रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि बच्चों का स्कूलों में दाखिला होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके पढ़ने, लिखने और गणित की बुनियादी समझ विकसित करने पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
सरकारी स्कूलों में सुधार, लेकिन चुनौती अब भी बड़ी
रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों के पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों की पढ़ने की क्षमता में वर्ष 2022 के मुकाबले वर्ष 2024 में कुछ सुधार दर्ज किया गया। वर्ष 2022 में सरकारी स्कूलों के केवल 18.1 प्रतिशत विद्यार्थी दूसरी कक्षा के स्तर का पाठ पढ़ सकते थे। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 21.8 प्रतिशत हो गया।
निजी स्कूलों में भी इस अवधि के दौरान सुधार देखने को मिला। वर्ष 2022 में दूसरी कक्षा के स्तर का पाठ पढ़ने में सक्षम पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों का प्रतिशत 54.9 था, जो वर्ष 2024 में बढ़कर 60.3 प्रतिशत हो गया।
हालांकि, दोनों वर्षों के आंकड़ों की तुलना करने पर यह स्पष्ट होता है कि सुधार के बावजूद सरकारी और निजी स्कूलों के बीच सीखने के स्तर का बड़ा अंतर बना हुआ है। सरकारी स्कूलों में पांचवीं कक्षा के लगभग पांच में से चार विद्यार्थी दूसरी कक्षा के स्तर का पाठ पढ़ने में सक्षम नहीं पाए गए। यह स्थिति प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
तीसरी कक्षा के विद्यार्थियों की स्थिति भी चिंताजनक
रिपोर्ट में केवल पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों की स्थिति ही नहीं, बल्कि छोटी कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों की बुनियादी शैक्षणिक क्षमता को लेकर भी चिंता जताई गई है। ग्रामीण जम्मू-कश्मीर में तीसरी कक्षा के केवल 16.7 प्रतिशत विद्यार्थी दूसरी कक्षा के स्तर का पाठ पढ़ पाए।
यह आंकड़ा बताता है कि शुरुआती कक्षाओं में ही बड़ी संख्या में बच्चों को पढ़ने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। प्राथमिक शिक्षा के शुरुआती वर्षों में बच्चों की पढ़ने और समझने की क्षमता विकसित नहीं हो पाती, तो आगे की कक्षाओं में उन्हें अन्य विषयों को समझने में भी परेशानी हो सकती है।
बुनियादी शिक्षा का उद्देश्य केवल बच्चों को अगली कक्षा में पहुंचाना नहीं, बल्कि उन्हें उम्र और कक्षा के अनुरूप आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करना भी है। ऐसे में शुरुआती कक्षाओं में पढ़ने की क्षमता कमजोर रहना शिक्षा विभाग, स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
आठवीं कक्षा तक पहुंचने के बाद भी 40 प्रतिशत से अधिक बच्चे पीछे
सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि सीखने की यह समस्या केवल प्राथमिक कक्षाओं तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण जम्मू-कश्मीर में आठवीं कक्षा के 58.5 प्रतिशत विद्यार्थी ही दूसरी कक्षा के स्तर का पाठ पढ़ने में सक्षम पाए गए।
इसका अर्थ है कि आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले 41.5 प्रतिशत विद्यार्थी भी दूसरी कक्षा के स्तर का पाठ पढ़ने की क्षमता हासिल नहीं कर पाए थे। यानी माध्यमिक शिक्षा के करीब पहुंचने तक भी बड़ी संख्या में बच्चों की बुनियादी पढ़ने की क्षमता कमजोर बनी हुई है।
यह स्थिति इस बात की ओर संकेत करती है कि विद्यार्थियों के सीखने के स्तर का नियमित आकलन करना और कमजोर बच्चों के लिए अतिरिक्त शिक्षण व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है। यदि बच्चों की शुरुआती शैक्षणिक कमियों को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो आगे की पढ़ाई में उनका प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।
बुनियादी शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत
आरजीआईसीएस की रिपोर्ट में फाउंडेशनल लिटरेसी और न्यूमेरसी यानी बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों को शुरुआती कक्षाओं में ही सही तरीके से पढ़ना, लिखना, पाठ का अर्थ समझना और गणित की बुनियादी गणनाएं करना सिखाना है।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों की सीखने की क्षमता में सुधार के लिए कक्षाओं में नियमित अभ्यास, विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार पढ़ाई, शिक्षकों को आवश्यक सहयोग और समय-समय पर मूल्यांकन जैसे कदम महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जिन विद्यार्थियों को पढ़ने में कठिनाई है, उनकी पहचान कर अतिरिक्त कक्षाओं और विशेष शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से उनकी मदद की जा सकती है।
सरकारी स्कूलों में सीखने के स्तर को बेहतर बनाने के लिए यह भी जरूरी है कि केवल परीक्षा परिणाम और अगली कक्षा में विद्यार्थियों की पदोन्नति पर ध्यान देने के बजाय यह सुनिश्चित किया जाए कि बच्चे वास्तव में अपनी कक्षा के अनुरूप ज्ञान हासिल कर रहे हैं।
शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के लिए 29,953 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव
रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के सामाजिक विकास को मजबूत बनाने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण सहित विभिन्न क्षेत्रों में अगले पांच वर्षों के दौरान 29,953 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसका उद्देश्य सामाजिक क्षेत्र में सुधार लाना और विकास से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना है।
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए निवेश के साथ-साथ योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, उपलब्ध संसाधनों के उचित इस्तेमाल और बच्चों के सीखने के वास्तविक परिणामों पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण होगा। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
वर्ष 2024 के आंकड़ों पर आधारित है रिपोर्ट
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि रिपोर्ट में प्रस्तुत शिक्षा संबंधी आंकड़े वर्ष 2024 की एएसईआर रिपोर्ट पर आधारित हैं। ये वर्ष 2026 में जम्मू-कश्मीर में किए गए किसी नए राज्यव्यापी सर्वेक्षण के आंकड़े नहीं हैं। इसलिए इन आंकड़ों को मौजूदा स्थिति का बिल्कुल ताजा आकलन मानने के बजाय वर्ष 2024 में ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की सीखने की क्षमता की तस्वीर के रूप में देखा जाना चाहिए।
इसके बावजूद ये आंकड़े शिक्षा व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं। पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों का दूसरी कक्षा के स्तर का पाठ न पढ़ पाना और आठवीं कक्षा तक पहुंचने के बाद भी बड़ी संख्या में बच्चों का इसी स्तर पर पिछड़ना बताता है कि बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासों की जरूरत है।
जम्मू-कश्मीर में शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक सफलता तभी सुनिश्चित हो सकती है, जब स्कूलों में दाखिले और उपस्थिति के साथ-साथ बच्चों के पढ़ने, लिखने और समझने की क्षमता में भी ठोस सुधार दिखाई दे।



