श्रीनगर, 24 अक्टूबर 2025 – जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरदकालीन सत्र की शुरुआत ऐसे हुई जैसे किसी ने सियासी माचिस में आग लगा दी हो! पहले दिन ही नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक आपस में इस कदर भिड़े कि सदन का माहौल अखाड़े में बदल गया।

NC ने बरसाए बयान, BJP ने पलटवार से मचाई गूंज
NC के विधायक बशीर वीरी ने सरकार पर बरसते हुए कहा कि “विकास के नाम पर बस घोषणाओं की बारिश हो रही है, हकीकत में धरातल सूखा पड़ा है।”
इतना सुनते ही BJP के विधायक भड़क उठे — एक ने कहा, “काम दिख नहीं रहा तो चश्मा बदलो, सरकार नहीं!”
सदन में ठहाके, नारों और तालियों के बीच माहौल गर्म हो गया।
विपक्ष का हमला – “जनता की आवाज़ दबाई जा रही है”
कांग्रेस के जी.ए. मीर बोले, “जब सवाल उठाना जुर्म बन जाए, तो समझ लीजिए लोकतंत्र बीमार है।”
पीडीपी के रफीक नाइक ने कहा, “सदन में जवाब चाहिए, जुमले नहीं।”
माकपा नेता एम.वाई. तारिगामी ने जोड़ते हुए कहा, “बहस होनी चाहिए, बहाव नहीं।”
BJP का पलटवार – “विकास से डरता है विपक्ष”
BJP विधायक विक्रम रंधावा ने कहा, “विपक्ष को डर है कि अगर सरकार के प्रोजेक्ट पूरे दिखे, तो उनका अस्तित्व मिट जाएगा।”
इस पर NC और कांग्रेस के विधायकों ने जमकर विरोध किया, मेज़ें थपथपाईं, और नारेबाजी शुरू हो गई।
स्पीकर अब्दुल रहीम बार-बार कहते रहे – “कृपया संयम रखें दोस्तों!”
लेकिन सियासी भैंस अब मैदान में उतर चुकी थी — और थमने का नाम नहीं ले रही थी।
सीएम उमर अब्दुल्ला ने दिया सधा हुआ जवाब
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने माहौल ठंडा करते हुए कहा,
“बहस जरूरी है, लेकिन जनता यह देखना चाहती है कि हम काम कब करेंगे। ये सदन नारेबाजी का नहीं, नीति बनाने का मंच है।”
उन्होंने कहा कि अब वक्त है “राजनीति से ऊपर उठकर जनता की बात करने का।”
हंगामे के बीच सदन स्थगित
लगातार हंगामे के बाद स्पीकर ने कार्यवाही सोमवार तक स्थगित कर दी।
सदन में सभी सदस्यों ने दिवंगत नेताओं के सम्मान में दो मिनट का मौन रखा — लेकिन बाहर आते ही नेताओं के बीच फिर वही “तू-तू मैं-मैं” शुरू हो गई।

