JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल | जम्मू
शहर में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण ने लोगों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हवा में प्रदूषित कणों की मात्रा बढ़ने से विशेष रूप से सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने लोगों को वायु प्रदूषण से बचने और अपनी सेहत को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को जम्मू का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 138 दर्ज किया गया, जो सामान्य स्तर से अधिक है। वायु गुणवत्ता सूचकांक के माध्यम से हवा में मौजूद प्रदूषण के स्तर का पता लगाया जाता है। एक्यूआई 50 तक रहने पर हवा को साफ माना जाता है, जबकि 51 से 100 तक का स्तर संतोषजनक श्रेणी में आता है। इसके बाद प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर विशेष रूप से बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, हवा में मौजूद धूल, धुआं और बारीक प्रदूषित कण सांस के माध्यम से शरीर के अंदर पहुंचकर फेफड़ों को प्रभावित कर सकते हैं। इसका असर उन लोगों पर अधिक पड़ता है, जिन्हें पहले से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या सांस संबंधी अन्य बीमारियां हैं।
अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के मरीजों को अधिक खतरा
चेस्ट डिजीज विशेषज्ञ डॉ. राजेश्वर शर्मा के अनुसार, वायु प्रदूषण बढ़ने से अस्थमा के मरीजों की परेशानियां बढ़ सकती हैं। प्रदूषित हवा के कारण सांस की नलियों में सूजन और जलन हो सकती है, जिससे कुछ मरीजों को अस्थमा का दौरा पड़ने का खतरा रहता है। इसके अलावा ब्रोंकाइटिस से पीड़ित लोगों को भी सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
उन्होंने बताया कि प्रदूषण का लगातार संपर्क फेफड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में पहले से सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। लोगों को धूल और धुएं वाले स्थानों पर अधिक समय बिताने से बचना चाहिए तथा प्रदूषण के संपर्क को कम करने का प्रयास करना चाहिए।
हृदय रोगियों के लिए भी बढ़ सकती है परेशानी*
जीएमसी जम्मू के हृदय रोग विभाग के एचओडी डॉ. सुशील शर्मा ने लोगों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि हवा में मौजूद जहरीली गैसें, धुआं और बारीक प्रदूषित कण वायु गुणवत्ता को खराब करते हैं। इनका प्रभाव केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए भी परेशानी बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से सांस और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए लोगों को अपने आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखने और प्रदूषण फैलाने वाले कारणों को कम करने की दिशा में प्रयास करने चाहिए।
आंखों में जलन और गले में खराश की भी शिकायत
जीएमसी जम्मू के विशेषज्ञ डॉ. विशाल टंडन के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। सीओपीडी और अस्थमा के मरीजों के लिए प्रदूषित वातावरण विशेष रूप से नुकसानदायक हो सकता है।
उन्होंने बताया कि तेज आवाज और धुएं के अलावा हवा में मौजूद बारीक प्रदूषित कण भी लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। प्रदूषण का असर केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके दुष्प्रभाव कुछ समय तक बने रह सकते हैं।
लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत
विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे वायु प्रदूषण को कम करने में अपनी भूमिका निभाएं। अनावश्यक रूप से धुआं पैदा करने वाली गतिविधियों से बचें और पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए जागरूकता दिखाएं। जिन लोगों को पहले से सांस या हृदय संबंधी बीमारी है, उन्हें प्रदूषण के स्तर को ध्यान में रखते हुए बाहर निकलने में सावधानी बरतनी चाहिए।
इसके अलावा बच्चों और बुजुर्गों को भी अधिक प्रदूषित वातावरण से दूर रखने की जरूरत है। यदि किसी व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी या अन्य गंभीर लक्षण महसूस हों तो चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
जम्मू में बढ़ता वायु प्रदूषण एक ऐसी समस्या है, जिस पर समय रहते ध्यान देना जरूरी है। स्वच्छ हवा केवल किसी एक वर्ग की जरूरत नहीं, बल्कि हर नागरिक के बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य के लिए आवश्यक है। इसके लिए प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।


