JNM संवाददाता जम्मू

बिजली-पानी काटने के आदेश, प्रशासन ने दिखाई सख्ती – अवैध कब्जों पर अब ‘नो टॉलरेंस’
जम्मू जिले में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा ऐक्शन मोड अपनाया है। बाहू तहसीलदार कार्यालय ने छन्नी रामा स्थित नीदेश एनक्लेव के पास बसी रोहिंग्या बस्ती की बिजली और पानी की सप्लाई तुरंत बंद करने के आदेश जारी किए हैं। आदेश त्रिकुटा नगर स्थित बाहू तहसीलदार कार्यालय से जारी हुआ है, जिसे एक्सईएन पीडीडी (बिजली विभाग) और एक्सईएन पीएचई गांधी नगर (जल विभाग) को संबोधित किया गया है।
बस्ती की शिकायत पर एक्शन
यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब नीदेश एनक्लेव रेज़िडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रशासन को एक विस्तृत शिकायत भेजी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कुछ रोहिंग्या परिवारों ने सरकारी और निजी जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है और वहां स्क्रैप का कारोबार भी चला रहे हैं। इससे इलाके में गंदगी, शोर-शराबा और असुरक्षा का माहौल बन गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के वक्त झगड़े और आपसी विवाद आम बात बन चुके हैं। इलाके की स्वच्छता और शांति दोनों पर असर पड़ा है।
तहसीलदार का कड़ा आदेश
इन शिकायतों और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए तहसीलदार बाहू ने आदेश जारी करते हुए साफ कहा “नीदेश एनक्लेव के आसपास अवैध रूप से बनी बस्तियों की बिजली और पानी की सप्लाई तत्काल प्रभाव से बंद की जाए, और कार्रवाई की रिपोर्ट तहसील कार्यालय को सौंपी जाए।”
यह आदेश, साफ संकेत देता है कि जम्मू प्रशासन अब अवैध कब्जों और बस्तियों के खिलाफ ‘टॉलरेंस ज़ीरो’ नीति पर काम कर रहा है।
प्रशासनिक कार्रवाई या राजनीतिक संदेश?
यह कदम सिर्फ स्थानीय प्रशासनिक कार्रवाई नहीं माना जा रहा — बल्कि इसे राजनीतिक और सुरक्षा दोनों दृष्टियों से अहम संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
जम्मू में रोहिंग्या शरणार्थियों की मौजूदगी लंबे समय से विवाद का विषय रही है।
सुरक्षा एजेंसियां कई बार चेतावनी दे चुकी हैं कि कुछ बस्तियों में संदिग्ध गतिविधियों का खतरा है।
वहीं, स्थानीय जनता और सामाजिक संगठनों का दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा था।
इस पृष्ठभूमि में यह कदम सरकार की ओर से संदेश देने वाला फैसला माना जा रहा है कि अब अवैध रूप से बसे किसी भी समुदाय या समूह को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे कहीं से भी आए हों।
क्या आगे और बड़ी कार्रवाई संभव?
सूत्रों के मुताबिक, यह कदम पहला चरण है।
प्रशासन अब इन बस्तियों का डेमोग्राफिक और एन्क्रोचमेंट सर्वे कराने की तैयारी में है। अगर यह रिपोर्ट गंभीर हुई तो उजाड़ अभियान भी संभव है।
जम्मू प्रशासन का यह कदम दिखाता है कि अब सरकार रोहिंग्या बस्तियों को लेकर कोई समझौता नहीं करेगी। यह मामला केवल अवैध कब्जे का नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्वच्छता और स्थानीय जनभावनाओं का भी है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन सकता है — क्योंकि जम्मू में यह विषय हमेशा सुरक्षा और जनसंख्या संतुलन से जुड़ा र

