JNM संवाददाता जम्मू
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के नगरोटा और बडगाम सीटों पर होने वाले उपचुनाव अब रोमांचक मोड़ पर पहुंच गए हैं। नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख गुजरने के बाद अब तस्वीर साफ है — किसी भी प्रत्याशी ने मैदान नहीं छोड़ा है। दोनों सीटों पर कुल 27 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। नगरोटा में 10 जबकि बडगाम में 17 प्रत्याशी मैदान में हैं।

नगरोटा: भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस आमने-सामने
नगरोटा सीट पर मुकाबला इस बार बेहद दिलचस्प है।
भाजपा की देवयानी राणा और नेशनल कॉन्फ्रेंस की शमीम बेगम के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है।
वहीं, नेशनल पैंथर्स पार्टी (इंडिया) के हर्षदेव सिंह, आम आदमी पार्टी के जोगेंद्र सिंह, और अपनी पार्टी के बोधराज भी मुकाबले को बहुकोणीय बना रहे हैं।
निर्दलीय उम्मीदवारों में अनिल शर्मा, गुलजार हुसैन, और शाम मोहम्मद जैसे नाम भी वोटों में सेंध लगा सकते हैं।
बडगाम: आगा परिवार की सियासी जंग
बडगाम सीट इस बार “आगा बनाम आगा” की जंग का मैदान बन गई है।
यहां नेशनल कॉन्फ्रेंस के आगा सैयद महमूद, पीडीपी के आगा सैयद मुंताजिर मेहदी, और भाजपा के आगा सैयद मोहसिन मौसवी — तीनों एक ही प्रभावशाली परिवार से ताल्लुक रखते हैं।
इनके अलावा आप की दीवा खान, अपनी पार्टी के मुख्तार अहमद डार, राष्ट्रीय लोकदल के मंजूर अहमद गनी, और निर्दलीय नाजिर अहमद खान समेत कई नए चेहरे भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
कुल 17 उम्मीदवार इस सीट पर मतदाताओं को लुभाने में जुटे हैं।
आयोग ने बढ़ाई सख्ती, प्रचार पर पैनी नजर
चुनाव आयोग ने शुक्रवार से प्रचार की अनुमति दे दी है, जो 9 नवंबर तक जारी रहेगा।
सभी निर्दलीय उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न भी आवंटित कर दिए गए हैं।
आयोग ने नोडल अधिकारी तैनात किए हैं जो प्रचार और खर्च पर पैनी निगरानी रखेंगे।
सबसे अहम बात — मतदान केंद्रों में मोबाइल फोन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे।
मतदाता अपने मोबाइल फोन केंद्र के बाहर तैनात कर्मचारियों को सौंपेंगे।
साथ ही, सभी मतदान केंद्रों पर पेयजल, शौचालय, रैंप और संकेतक बोर्ड की व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है ताकि मतदान सुचारू रूप से हो सके।
शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर 1950
उपचुनाव से जुड़ी किसी भी तरह की शिकायत के लिए चुनाव आयोग ने टोल-फ्री नंबर 1950 जारी किया है।
यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी।
मतदाता किसी भी गड़बड़ी जैसे दूसरे की जमीन पर पोस्टर-बैनर लगाना, लुभावने वादे करना या वस्तुएं बांटने जैसी शिकायतें सीधे अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं।
मतदान 11 नवंबर को होगा, और प्रचार अभियान अब पूरी रफ्तार पकड़ चुका है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह उपचुनाव आगामी विधानसभा चुनावों की दिशा तय कर सकता है — खासतौर पर यह देखने के लिए कि जम्मू और कश्मीर की जनता किस पर भरोसा जताती है: राष्ट्रीय दलों पर या क्षेत्रीय चेहरों पर।

