JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल | जम्मू
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के भीतर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने 3 नवंबर को पार्टी की सदस्यता और लोकसभा सांसद पद से इस्तीफा देने के अपने फैसले को दोहराया है। उनके इस ऐलान से पार्टी के अंदर जारी असंतोष और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
आगा रुहुल्लाह ने साफ किया है कि वह अपने फैसले से पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि पार्टी नेतृत्व पिछले दो वर्षों के दौरान हुई राजनीतिक गलतियों और जनता से किए गए वादों को पूरा करने में नाकामी स्वीकार करता है, तो वह अपने फैसले पर दोबारा विचार कर सकते हैं। इसके लिए नेतृत्व को सार्वजनिक रूप से अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी, जनता से माफी मांगनी होगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।
कुर्सी के लिए नहीं, जनता से किए वादों के लिए लड़ाई
रुहुल्लाह ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक पद या कुर्सी के लिए नहीं है, बल्कि कश्मीर की जनता से किए गए वादों और राजनीतिक सिद्धांतों को लेकर है। उनका आरोप है कि विधानसभा चुनाव के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जनता से कई बड़े वादे किए थे, लेकिन सरकार बनने के बाद उन वादों को पूरा करने की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए।
उन्होंने विशेष रूप से अनुच्छेद 370 की बहाली, संवैधानिक अधिकारों की पुनर्स्थापना, आरक्षण नीति में बदलाव और जेलों में बंद कैदियों की रिहाई जैसे मुद्दों का उल्लेख किया। उनका कहना है कि चुनाव के समय इन मुद्दों को लेकर जनता को भरोसा दिलाया गया था, लेकिन अब तक ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं।
बंद कमरों में बैठकर चर्चा करने से नहीं चलेगा काम
आगा रुहुल्लाह ने पार्टी नेतृत्व के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल बंद कमरों में बैठकें करने और आश्वासन देने से जनता का विश्वास वापस नहीं जीता जा सकता। नेतृत्व को सामने आकर अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि पार्टी के भीतर उन लोगों की जवाबदेही तय की जाए, जिन पर निजी हितों को प्राथमिकता देने और जनता से जुड़े मुद्दों को पीछे छोड़ने के आरोप हैं। ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटाने की दिशा में भी कदम उठाए जाने चाहिए।
रुहुल्लाह ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के हालिया बयानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने अनुच्छेद 370 की बहाली को लेकर पार्टी की वास्तविक प्रतिबद्धता पर संदेह जताया। उनका कहना है कि जनता का भरोसा तभी बहाल हो सकता है, जब पार्टी अपने वादों को पूरा करने के लिए जमीन पर ठोस कदम उठाए।
विधायकों से संपर्क और पार्टी तोड़ने की अटकलों को किया खारिज
पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी और कुछ विधायकों के असंतोष को लेकर भी रुहुल्लाह ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वह किसी भी विधायक के संपर्क में नहीं हैं और न ही किसी को पार्टी छोड़ने के लिए कह रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग उनके विचारों से सहमत हैं और उनके साथ आना चाहते हैं, वे अपने विवेक से फैसला ले सकते हैं। वह पार्टी को तोड़ने की राजनीति में विश्वास नहीं रखते। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार को अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने का अवसर मिलना चाहिए और सरकार गिराने के लिए खरीद-फरोख्त की राजनीति नहीं होनी चाहिए।
पिता की बरसी पर जनसभा में करेंगे इस्तीफे का ऐलान
रुहुल्लाह मेहदी ने बताया कि 3 नवंबर को उनके पिता बलिदानी आगा सैयद मेहदी की बरसी है। इस अवसर पर वह बडगाम के बेहिश्त-ए-जहरा पार्क में आयोजित जनसभा को संबोधित करेंगे। इसी दौरान वह अपने इस्तीफे के फैसले को अमलीजामा पहनाने की बात कह चुके हैं।
उनके इस फैसले से नेशनल कॉन्फ्रेंस के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। अब सबकी नजरें 3 नवंबर की जनसभा पर टिकी हैं। देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व उनके आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या आखिरी समय में इस राजनीतिक टकराव को रोकने के लिए कोई पहल होती है।


