JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल | जम्मू
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान को लेकर दिए गए बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। उनके बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे देश की एकता और अखंडता के खिलाफ बताया है। वहीं, कांग्रेस ने इस बयान से दूरी बनाते हुए स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों में पाकिस्तान के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ, जब फारूक अब्दुल्ला ने बारामूला में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पाकिस्तान की भूमिका को लेकर टिप्पणी की। उनके बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
पाकिस्तान को लेकर क्या बोले फारूक अब्दुल्ला?
बारामूला में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान लगातार कश्मीर और कश्मीरियों के मुद्दे को अलग-अलग मंचों पर उठा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान की ओर से इन मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाए जाने के कारण जम्मू-कश्मीर के लोगों की जान बच रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर इसलिए खामोश है, क्योंकि उस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव है।
फारूक अब्दुल्ला की इसी टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। भाजपा नेताओं ने उनके बयान पर सवाल उठाए, जबकि कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर के मामलों में किसी बाहरी देश की भूमिका स्वीकार नहीं की जा सकती।
कांग्रेस ने पाकिस्तान के हस्तक्षेप को किया खारिज
जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने फारूक अब्दुल्ला के बयान से दूरी बनाते हुए अपना रुख स्पष्ट किया। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंद्र शर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दे भारत के आंतरिक मामले हैं और इनका समाधान देश के संवैधानिक दायरे में ही होना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों में बोलने या हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। कांग्रेस ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और यहां के भविष्य तथा लोगों से जुड़े मुद्दों पर फैसला भारत के भीतर ही होना चाहिए।
रविंद्र शर्मा ने पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर के मामलों में हस्तक्षेप करने के बजाय गुलाम कश्मीर की स्थिति पर ध्यान देने की सलाह दी। कांग्रेस के इस रुख से स्पष्ट हुआ कि पार्टी ने फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी का समर्थन करने के बजाय पाकिस्तान के हस्तक्षेप के मुद्दे पर अपना अलग पक्ष रखा है।
भाजपा ने बयान को बताया देश की एकता के खिलाफ
फारूक अब्दुल्ला के बयान पर भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेता अल्ताफ ठाकुर ने उनकी टिप्पणी को देश के खिलाफ खुला विद्रोह करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान देश की एकता और अखंडता के खिलाफ हैं। साथ ही उन्होंने फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग भी उठाई।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने भी फारूक अब्दुल्ला के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला को सीमा पार भी देखना चाहिए और यह समझना चाहिए कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लोगों की क्या स्थिति है।
भाजपा नेताओं ने उनके बयान की आलोचना करते हुए पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए और कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर पाकिस्तान की भूमिका को उचित ठहराना सही नहीं है।
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बढ़ी बयानबाजी
फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर पाकिस्तान, केंद्र सरकार और प्रदेश के राजनीतिक भविष्य से जुड़े मुद्दे चर्चा में आ गए हैं। एक तरफ भाजपा ने उनके बयान को देश की एकता और अखंडता से जोड़कर निशाना साधा है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने पाकिस्तान के हस्तक्षेप को अस्वीकार करते हुए अपना पक्ष स्पष्ट किया है।
इस पूरे विवाद ने प्रदेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के बीच मतभेदों को सामने ला दिया है। हालांकि, इस मामले में राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, लेकिन बयान को लेकर उठे सवालों पर आगे की राजनीतिक प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण रहेगी।


