JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल | जम्मू
जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के इतिहास में ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह का योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 1947 में जब पाकिस्तान समर्थित कबायली हमलावर जम्मू-कश्मीर पर कब्जा करने के इरादे से आगे बढ़ रहे थे, तब महाराजा हरि सिंह की सेना के चीफ ऑफ स्टाफ ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह ने सीमित सैनिकों के साथ मोर्चा संभाला। उनके नेतृत्व में जवानों ने दुश्मन की बढ़त को रोकने के लिए संघर्ष किया और भारतीय सेना के कश्मीर पहुंचने तक उसे आगे बढ़ने से रोकने में अहम भूमिका निभाई।
विलय दिवस के अवसर पर सोमवार को जम्मू और सांबा जिले में ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह के बलिदान और वीरता को याद किया गया। इस दौरान पूर्व सैनिकों, सैन्य अधिकारियों और अन्य लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा में उनके योगदान को नमन किया।
करीब 100 जवानों के साथ संभाला मोर्चा
22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान समर्थित कबायली हमलावरों ने जम्मू-कश्मीर पर हमला शुरू किया था। हमलावरों का उद्देश्य तेजी से श्रीनगर पहुंचकर क्षेत्र पर कब्जा करना था। उस समय भारतीय सेना जम्मू-कश्मीर नहीं पहुंची थी। ऐसे कठिन हालात में ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह ने करीब 100 सैनिकों के साथ उड़ी क्षेत्र में मोर्चा संभालने का निर्णय लिया।
दुश्मन की संख्या और सैन्य ताकत अधिक होने के बावजूद ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह और उनके जवानों ने साहस के साथ मुकाबला किया। हमलावरों की रफ्तार कम करने के लिए रास्तों और पुलों को नष्ट करने जैसी रणनीतियां अपनाई गईं। इस संघर्ष में उनके कई साथी वीरगति को प्राप्त हुए, लेकिन उनके प्रतिरोध के कारण हमलावरों की श्रीनगर की ओर बढ़त प्रभावित हुई।
जम्मू-कश्मीर के विलय से जुड़ा ऐतिहासिक योगदान
ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में किए गए इस प्रतिरोध को जम्मू-कश्मीर के इतिहास की निर्णायक घटनाओं में गिना जाता है। 26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ जम्मू-कश्मीर के विलय संबंधी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। इसके अगले दिन, 27 अक्टूबर को भारतीय सेना श्रीनगर पहुंची और हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी वीरता के सम्मान में उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनका नाम आज भी जम्मू-कश्मीर की रक्षा के लिए साहस और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
जम्मू में स्मारक पर दी गई श्रद्धांजलि
विलय दिवस पर जम्मू स्थित महावीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह चौक में उनके स्मारक पर एक्स सर्विस लीग की ओर से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान पूर्व सैनिकों और सैन्य अधिकारियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को याद किया।
कार्यक्रम में सांसद जुगल किशोर शर्मा भी मौजूद रहे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के भारत के साथ विलय के ऐतिहासिक घटनाक्रम में ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। वहीं, सांबा जिले के बगूना गांव में भी उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। बगूना को ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह का पैतृक गांव बताया जाता है।
इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा बलिदान
सेवानिवृत्त मेजर जनरल गोवर्धन सिंह जम्वाल के अनुसार, ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह ने सीमित संसाधनों और कम सैनिकों के बावजूद दुश्मन को रोकने के लिए असाधारण साहस दिखाया। उनके प्रतिरोध ने भारतीय सेना के पहुंचने तक महत्वपूर्ण समय उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई।
ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह का बलिदान इस बात की याद दिलाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी कर्तव्य, साहस और देश के प्रति समर्पण इतिहास की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय से जुड़े इस ऐतिहासिक अध्याय में उनका योगदान सदैव सम्मान के साथ याद किया जाएगा।



