JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल | जम्मू
शहर के शिव मार्केट में लगी भीषण आग ने न केवल दुकानों को जलाकर खाक किया, बल्कि कई परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट भी खड़ा कर दिया है। वर्षों की मेहनत से खड़ा किया गया कारोबार कुछ ही घंटों में तबाह हो गया। जिस बाजार में कुछ दिन पहले तक ग्राहकों की आवाजाही, व्यापारिक गतिविधियां और त्योहारों की तैयारियां दिखाई दे रही थीं, वहां अब जली हुई दुकानों, राख के ढेर और मायूस चेहरों का मंजर नजर आ रहा है। आग से प्रभावित दुकानदारों के लिए यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि उनकी जिंदगीभर की मेहनत और भविष्य से जुड़ा बड़ा झटका है।
इस अग्निकांड ने उन व्यापारियों को भी बेबस कर दिया है, जिन्होंने अपनी जवानी का बड़ा हिस्सा दुकानें चलाने और परिवारों को बेहतर जिंदगी देने में लगा दिया। किसी ने दशकों तक मेहनत करके अपना कारोबार खड़ा किया था, तो किसी ने इसी दुकान की कमाई से बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और कर्मचारियों के परिवारों की जिम्मेदारी संभाल रखी थी। अब उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कारोबार ही खत्म हो गया, तो जिंदगी को दोबारा पटरी पर कैसे लाया जाए।
35 साल की मेहनत हुई राख, कर्मचारियों की चिंता ने बढ़ाया दर्द
आग से प्रभावित एक दुकानदार ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उसकी दुकान करीब 35 साल पुरानी थी। इतने लंबे समय में उसने मेहनत करके कारोबार खड़ा किया और कई लोगों को रोजगार दिया, लेकिन आग ने सब कुछ खत्म कर दिया। दुकानदार के मुताबिक, उसकी दुकान पर 10 कर्मचारी काम करते थे और उनकी कमाई से 10 परिवारों का चूल्हा जलता था। अब दुकान जलने के बाद उसे अपनी आजीविका के साथ-साथ उन परिवारों की चिंता भी सता रही है, जो रोजगार के लिए उसके कारोबार पर निर्भर थे।
दुकानदार का दर्द इस बात से समझा जा सकता है कि दुकान उसके लिए केवल व्यापार करने की जगह नहीं थी, बल्कि वर्षों की मेहनत, जमा पूंजी और परिवार की उम्मीदों का केंद्र थी। आग में सामान और कारोबार नष्ट होने के बाद उसके सामने दोबारा शुरुआत करने की चुनौती खड़ी हो गई है। इतने लंबे समय में जो कुछ कमाया और बनाया था, उसे फिर से खड़ा करना आसान नहीं होगा।
30 से अधिक दुकानों के प्रभावित होने से रोजगार पर संकट
शिव मार्केट में आग की चपेट में आई 30 से अधिक दुकानों से जुड़े कारोबारियों और कर्मचारियों के सामने अब भविष्य की चिंता है। दुकानदारों के अनुसार, बाजार की प्रत्येक दुकान में औसतन चार से छह लोग काम करते थे, जबकि कुछ दुकानों में कर्मचारियों की संख्या इससे अधिक थी। ऐसे में प्रभावित दुकानों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े अनेक लोगों की आजीविका पर असर पड़ने की आशंका है।
इन कर्मचारियों में ऐसे लोग भी हो सकते हैं, जिनके परिवारों का पूरा खर्च उनकी रोजाना या मासिक कमाई पर निर्भर रहता है। दुकानें बंद होने और कारोबार ठप पड़ने से उनकी आय का साधन प्रभावित हो गया है। व्यापारियों के लिए नुकसान की भरपाई करना जहां बड़ी चुनौती है, वहीं कर्मचारियों के लिए जल्द रोजगार मिलना भी जरूरी है।
दीपावली से पहले छाया आर्थिक संकट
त्योहारों के मौसम में बाजारों में कारोबार बढ़ने की उम्मीद रहती है। दीपावली से पहले दुकानदार अपने सामान की बिक्री और ग्राहकों की आवाजाही को लेकर तैयारियां करते हैं। लेकिन शिव मार्केट के प्रभावित व्यापारियों के लिए इस बार त्योहार की खुशियों पर चिंता भारी पड़ गई है।
जिन दुकानों में त्योहार के दौरान अच्छी बिक्री की उम्मीद थी, वहां अब कारोबार दोबारा शुरू करने की चिंता है। कई दुकानदारों के सामने यह सवाल है कि नुकसान की भरपाई कैसे होगी और परिवार की जरूरतें कैसे पूरी की जाएंगी। उनके लिए आने वाले दिन केवल कारोबार बहाल करने की चुनौती नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की परीक्षा भी होंगे।
राख के ढेर में तलाश रहे दोबारा शुरुआत का रास्ता
अग्निकांड के बाद प्रभावित दुकानदारों की निगाहें अब प्रशासन की ओर लगी हैं। व्यापारियों को उम्मीद है कि उनके नुकसान का आकलन किया जाएगा और जरूरतमंद परिवारों को राहत देने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। उनका मानना है कि यदि समय रहते मदद मिलती है, तो उन्हें दोबारा कारोबार शुरू करने और कर्मचारियों को रोजगार देने में सहारा मिल सकता है।
हालांकि, आग से हुए वास्तविक नुकसान, प्रभावित कारोबारियों की आर्थिक स्थिति और सहायता की संभावित जरूरतों का आकलन महत्वपूर्ण होगा। वर्षों से स्थापित कारोबार को दोबारा खड़ा करने के लिए केवल दुकान की मरम्मत ही नहीं, बल्कि सामान की व्यवस्था, पूंजी और कर्मचारियों की वापसी भी जरूरी होगी।
जांच के बाद सामने आएंगे आग के कारण
शिव मार्केट में आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आग लगने की वास्तविक वजह और उससे जुड़े अन्य तथ्यों की स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी। ऐसे हादसों के बाद अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन प्रतिक्रिया और बाजारों में सुरक्षा उपायों की समीक्षा भी महत्वपूर्ण हो जाती है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
फिलहाल शिव मार्केट के प्रभावित दुकानदारों के लिए सबसे बड़ी जरूरत अपने पैरों पर दोबारा खड़ा होना है। उनके नुकसान की भरपाई में समय लग सकता है, लेकिन राहत और सहयोग से कारोबार को फिर से शुरू करने की उम्मीद बनी रह सकती है। इस अग्निकांड ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि किसी बाजार में आग लगने से नुकसान केवल दुकानदार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उससे जुड़े कर्मचारियों और उनके परिवारों की जिंदगी भी प्रभावित होती है। अब प्रभावित परिवारों को इंतजार है कि उनकी मुश्किलों को समझते हुए उन्हें ऐसा सहयोग मिले, जिससे वे फिर से रोजगार और सम्मान के साथ अपनी जिंदगी आगे बढ़ा सकें।


