JNM संवाददाता, श्रीनगर — हरदीप जमवाल
22 अप्रैल को पहलगाम के बायसरन इलाके में हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे जम्मू-कश्मीर को झकझोर दिया था। पर्यटकों पर हुए इस हमले में 26 लोगों की मौत ने क्षेत्र की शांति, पर्यटन और लोगों के मनोबल पर गहरी चोट पहुंचाई। इसी त्रासदी के बीच अब एक नया कदम प्रदेश में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में उठाया गया है।
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए), जो इस हमले की जांच कर रही है, पहलगाम के बायसरन क्षेत्र में प्रस्तावित केबल कार परियोजना को शुरू करने पर अपनी सहमति दे दी है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सुरक्षा और जांच के मद्देनजर एनआईए से राय मांगी थी। एजेंसी ने स्पष्ट कहा है कि परियोजना को आगे बढ़ाने में उसे जांच स्तर पर कोई आपत्ति नहीं है।
हमले के बाद थमा प्रोजेक्ट—अब दोबारा रफ्तार की उम्मीद
हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान पहलगाम के विधायक अल्ताफ अहमद वानी द्वारा पूछे गए सवाल पर सरकार ने बताया था कि केबल कार परियोजना का काम एक कंपनी को सौंपा जा चुका है। लेकिन पोस्ट-पहलगाम सुरक्षा हालात के कारण प्रोजेक्ट का शुरुआती कार्य रुक गया था।
अब एनआईए की मंजूरी के साथ इस परियोजना में नई गति आने की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर केबल कार कॉर्पोरेशन द्वारा तैयार की गई रूपरेखा के मुताबिक, यह 1.4 किलोमीटर लंबी केबल कार लाइन होगी, जिसका निचला स्टेशन यात्रिनिवास के पास जबकि ऊपरी स्टेशन बायसरन में बनेगा। लगभग 9.13 हेक्टेयर वनभूमि इसके लिए चिन्हित की गई है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, जो पर्यटन विभाग भी देखते हैं, ने पहले ही डीपीआर के लिए टेंडर जारी कर दिए थे। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का काम रॉनमास इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया है। कंपनी के साथ समझौता हो चुका है, लेकिन सुरक्षा कारणों से वह अब तक साइट निरीक्षण नहीं कर सकी है।
अब कंपनी ने टोपोग्राफी और जियोटेक्निकल सर्वे की अनुमति मांगी है, जो प्रशासन से होते हुए आखिरकार एनआईए तक पहुंची और मंजूर हो चुकी है।
लागत, समयसीमा और स्थानीय उम्मीदें
पर्यटन विभाग के मुताबिक, इस परियोजना की अनुमानित लागत 100–120 करोड़ रुपये है, और सरकारी लक्ष्य इसे 18 महीनों में पूरा करने का है।
अगर परियोजना शुरू होती है, तो यह बायसरन को पर्यटन के नए आकर्षण के रूप में स्थापित कर सकती है। स्थानीय लोग मानते हैं कि यह प्रोजेक्ट न सिर्फ पहलगाम की टूटी अर्थव्यवस्था में नई जान डालेगा, बल्कि हमले के बाद पैदा तनाव के बीच सामान्य स्थिति की प्रतीकात्मक बहाली भी करेगा।
—उम्मीद की डोर

आतंकी हिंसा की प्रतिध्वनि अभी भी पहलगाम की वादियों में महसूस की जा सकती है, लेकिन इस परियोजना की मंजूरी उस सन्नाटे को तोड़ने वाली उम्मीद की एक नई डोर है।
बायसरन की ऊंची पहाड़ियों तक केबल कार की यह यात्रा शायद आने वाले समय में घाटी के लिए विश्वास और बहाली की नई कहानी लिख सके।

