JNM संवाददाता, श्रीनगर
हरदीप जमवाल
कश्मीर में आधुनिक परिवहन व्यवस्था का एक नया अध्याय लिखने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। अयोध्या, प्रयागराज, बनारस, गोवा और अंडमान जैसे शहरों की तर्ज पर अब घाटियों में भी वॉटर मेट्रो शुरू होने जा रही है। अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) और प्रदेश सरकार के बीच समझौते के बाद यह परियोजना अंतिम चरण में है। लगभग 900 करोड़ रुपये की लागत से झेलम नदी और डल झील के किनारों को एक नए वॉटर-ट्रांज़िट नेटवर्क में जोड़ा जाएगा।
कोची मेट्रो रेल लिमिटेड ने तैयार किया पूरा प्रारूप
कोची मेट्रो रेल लिमिटेड ने वॉटर मेट्रो का पूरा प्रारूप तैयार कर लिया है। इस मास्टर प्लान में अब झेलम और डल झील पर चार नई लोकेशन भी जोड़ दी गई हैं। कुल आठ रूट और 101.60 किमी का जल-मार्ग वॉटर मेट्रो द्वारा कवर होगा।
डल झील के इको सिस्टम पर पूरा ध्यान
परियोजना की सबसे अहम बात—इलेक्ट्रिक नावें। पर्यावरण और डल झील के इको सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए सभी नावें बैटरी से चलेंगी और किनारों पर चार्जिंग टर्मिनल बनाए जाएंगे।
पर्यटन + स्थानीय आवागमन—दोनों को नया ट्रांज़िट
धार्मिक, वाणिज्यिक, ऑफिस आने-जाने वाले और रिहायशी इलाकों को ध्यान में रखकर रूट डिजाइन किए गए हैं। यह नेटवर्क ट्रैफिक को कम करेगा और झेलम–डल का जलमार्ग नई पहचान देगा।
तीन चरणों में देशभर में वॉटर मेट्रो
पहला चरण: श्रीनगर, पटना, वाराणसी, गुवाहाटी, अयोध्या, प्रयागराज
दूसरा चरण: गोवा, अंडमान, तेजपुर, डिब्रूगढ़, अहमदाबाद, सूरत
तीसरा चरण: कटक, लक्षद्वीप, कोलकाता, मंगलौर, एलेप्पी, कोल्लम
डल झील के प्रमुख रूट
नेहरू पार्क – वकील कॉलोनी – निशात गार्डन – मिर्जा बाग
दूरी: 8.6 किमी
वकील कॉलोनी – मिर्जा बाग – दरगाह हजरतबल
दूरी: 5.3 किमी
नेहरू पार्क – दरगाह हजरतबल
दूरी: 8.2 किमी
जबरवन पार्क – चार चिनार – हजरतबल – नसीम बाग – शालीमार गार्डन
दूरी: 10 किमी
जबरवन पार्क – ट्यूलिप गार्डन – चार चिनार – वकील कॉलोनी – निशात बाग
दूरी: 10.8 किमी
झेलम नदी के प्रमुख रूट
पंथा चौक – बटवारा – केपी बाग – जीरो पुल
दूरी: 12.30 किमी
जीरो पुल – अमीराकदल – शाह-ए-हमदान – छट्टबल बांध
दूरी: 7.1 किमी
छट्टबल बांध – सुंबल – हाजिन पुल – वुलर टर्मिनल
दूरी: 42.2 किमी
श्रीनगर बनेगा देश का पहला पहाड़ी शहर जहां चलेगी वॉटर मेट्रो
परियोजना शुरू होने के बाद श्रीनगर देश का पहला पहाड़ी शहर बनेगा, जहां पर्यटन, स्थानीय यात्रा और पर्यावरण—तीनों को जल-आधारित मेट्रो सर्विस एक नई दिशा देगी।


