Friday, October 2, 2026
Friday, October 2, 2026

114 साल से कायम है बसोहली की रामलीला की परंपरा, खुले मैदान में आज भी बिना पारिश्रमिक किरदार निभाते हैं कलाकार

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के बसोहली में ऐतिहासिक रामलीला को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। 114 साल पुरानी यह रामलीला आज भी अपनी पारंपरिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है। शाम होते ही रामलीला मैदान में कलाकारों की आवाजाही शुरू हो जाती है और रात आठ बजे से देर रात तक रामायण के अलग-अलग प्रसंगों की रिहर्सल चलती है।

रामलीला क्लब के कार्यालय में इन दिनों रामायण के गीतों और संवादों की गूंज सुनाई दे रही है। कलाकार अपने-अपने किरदारों को बेहतर तरीके से निभाने के लिए लगातार अभ्यास कर रहे हैं। वरिष्ठ कलाकार नए कलाकारों को संवाद अदायगी, अभिनय, भाव-भंगिमाओं और मंच पर प्रस्तुति देने की बारीकियां समझा रहे हैं।

1912 में शुरू हुई थी रामलीला की परंपरा

बसोहली की रामलीला का इतिहास वर्ष 1912 से जुड़ा है। बताया जाता है कि इसी वर्ष पहली बार यहां रामलीला का मंचन शुरू हुआ था। इसके बाद यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही। 100 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी स्थानीय लोगों में इस आयोजन को लेकर उत्साह बना हुआ है।

यह रामलीला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि बसोहली की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी हिस्सा बन चुकी है। वर्षों से स्थानीय लोग इसमें किसी न किसी रूप में भाग लेते रहे हैं।

वरिष्ठ कलाकारों के मार्गदर्शन में तैयार हो रही नई पीढ़ी

रामलीला की तैयारियों में इस बार भी अनुभवी कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वरिष्ठ कलाकार रिहर्सल के दौरान युवा कलाकारों को उनके किरदार के अनुसार अभिनय करने की जानकारी दे रहे हैं।

किस संवाद को किस भाव के साथ बोलना है, मंच पर किस तरह खड़ा होना है और दर्शकों तक संवाद को प्रभावी तरीके से कैसे पहुंचाना है, इन सभी बातों पर अभ्यास के दौरान विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

कलाकार भी अपने किरदार को बेहतर बनाने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं। रिहर्सल के दौरान संवादों के साथ-साथ रामायण के प्रसंगों से जुड़े गीतों का भी अभ्यास किया जा रहा है।

खुले मैदान में मंचन बनाता है रामलीला को खास

बसोहली की रामलीला की एक प्रमुख विशेषता इसका खुले मैदान में आयोजित होना है। खुले वातावरण में बड़ी संख्या में दर्शकों के सामने रामायण के प्रसंगों का मंचन किया जाता है।

भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान, रावण और अन्य पात्रों के माध्यम से रामायण की कथा को मंच पर जीवंत किया जाता है। खुले मैदान में होने वाले इस मंचन में कलाकारों और दर्शकों के बीच भी एक अलग तरह का जुड़ाव देखने को मिलता है।

स्थानीय लोगों के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी लोग रामलीला देखने पहुंचते हैं। कई लोगों के लिए यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपनी पुरानी सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ने का अवसर भी है।

किरदार निभाने के लिए कलाकार नहीं लेते कोई पारिश्रमिक

बसोहली की रामलीला की सबसे खास बात यह है कि इसमें किरदार निभाने वाले कलाकार किसी तरह का पारिश्रमिक नहीं लेते। कलाकार अपनी श्रद्धा, रुचि और सेवा भाव के साथ रामलीला में हिस्सा लेते हैं।

राम और रावण जैसे प्रमुख किरदारों से लेकर अन्य पात्रों को निभाने वाले कलाकार भी इस आयोजन में अपनी भूमिका को सेवा के रूप में देखते हैं। रामलीला क्लब से जुड़े अन्य लोग भी आयोजन को सफल बनाने के लिए अलग-अलग स्तर पर सहयोग करते हैं।

कोई मंच की व्यवस्था में योगदान देता है तो कोई रिहर्सल और अन्य तैयारियों में अपनी सेवाएं देता है। इस तरह स्थानीय लोगों की सामूहिक भागीदारी से यह आयोजन आगे बढ़ रहा है।

देर रात तक सुनाई दे रहे रामायण के गीत

रामलीला शुरू होने से पहले इन दिनों रोजाना रिहर्सल का दौर जारी है। रात आठ बजे से कलाकार रामायण के अलग-अलग प्रसंगों का अभ्यास करते हैं और कई बार यह सिलसिला देर रात तक चलता है।

रामायण के गीतों की आवाज जब रामलीला क्लब के कार्यालय से बाहर तक पहुंचती है तो आसपास का माहौल भी भक्तिमय नजर आने लगता है। कलाकार गीतों के सुर, ताल, उच्चारण और प्रस्तुति पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

परंपरा को आगे बढ़ाने में जुटी नई पीढ़ी

114 वर्ष पुरानी इस रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि समय बदलने के बावजूद इसकी परंपरा आगे बढ़ रही है। वरिष्ठ कलाकार अपने अनुभव को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं, जबकि युवा कलाकार इस विरासत को आगे ले जाने के लिए मंच पर अपनी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं।

बसोहली की रामलीला इस बात का उदाहरण है कि किसी सांस्कृतिक परंपरा को केवल आयोजन के जरिए ही नहीं, बल्कि लोगों की भागीदारी, सेवा भाव और पीढ़ियों के जुड़ाव से भी जीवित रखा जा सकता है। यही वजह है कि 114 साल बाद भी बसोहली की रामलीला स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आयोजन बनी हुई है।

Hot this week

AP TET 2024: Answer Key for Day 1 exam to be OUT today at aptet.apcfss.in; Check 5-steps to download here

P TET Answer Key 2024: The School Education Department,...

Army brings hope to remote J&K village: Young Boy finds his voice after 8 years of silence

Kathua: 16 Aug 2025: For eight years, Akshay Sharma,...

Person impersonating as RTO arrested from Jammu’s Miran Sahib

JAMMU, 12 August 2025: A major fraud was busted...

SSP Jammu holds security review meeting ahead of Independence Day 2025

JAMMU: SSP Jammu, Joginder Singh, JKPS chaired a virtual...

Hard-core criminal arrested with weapons by Samba Police

Samba, August 19, 2025: Samba Police has achieved a...

2032 तक जम्मू-कश्मीर की सड़कों पर दौड़ेंगी 1.40 लाख इलेक्ट्रिक गाड़ियां, 900 चार्जिंग साइट बनाने का लक्ष्य

JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू जम्मू-कश्मीर में इलेक्ट्रिक वाहनों को...

वेतन बढ़ोतरी पर विधानसभा में घमासान, ‘प्राइवेट जॉब कर लो’ वाली टिप्पणी से गरमाया सदन

JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल | जम्मू जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बुधवार...

सोनमर्ग टनल में अचानक धधकी कार, फायर टीम ने समय रहते पाया आग पर काबू

JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले...

Related Articles

Popular Categories