JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू
कश्मीर के सेब बागानों में इस बार कुछ ऐसा हुआ जिसने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। शोपियां और अनंतनाग के कुछ इलाकों में सेब सामान्य समय से पहले ही पेड़ों से गिरने लगे। मामला बढ़ा तो सरकार ने इसकी वैज्ञानिक जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान एक खास फफूंदनाशी के बैच पर भी सवाल उठे हैं।
शोपियां के जैनापोरा समेत कई इलाकों में सेब गिरने की शिकायतों के बाद कृषि विभाग और विशेषज्ञों की टीमों ने प्रभावित बागानों का सर्वे किया। 37 गांवों में किए गए सर्वेक्षण के दौरान 61 बागानों में समय से पहले फल गिरने की समस्या सामने आई।
जांच के दौरान सामने आया कि 20 किसानों ने ‘सुपर एम-45’ का अकेले इस्तेमाल किया था, जबकि 41 किसानों ने इसे दूसरे कृषि रसायनों के साथ प्रयोग किया था। अलग-अलग समय पर किए गए निरीक्षण में फलों के गिरने की मात्रा बढ़ती गई। शुरुआत में करीब 30 प्रतिशत फल गिरने की बात सामने आई, जबकि बाद में यह आंकड़ा लगभग 70 प्रतिशत और कुछ बागानों में करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच गया।
238 किलो संदिग्ध स्टॉक जब्त
मामले में कृषि विभाग की लॉ एनफोर्समेंट विंग ने शोपियां में ‘सुपर एम-45’ के एसपी-1902 बैच से जुड़े 12 लाइसेंसधारी डीलरों की पहचान की। इनके पास से 238 किलोग्राम स्टॉक जब्त किया गया है।
जांच में इस बैच के पैकेट पर दर्ज कुछ जानकारियों को लेकर भी विसंगतियां सामने आई हैं। इनमें क्यूआर कोड, पंजीकरण संख्या, निर्माण लाइसेंस, लेबल और निर्माण तिथि सहित अन्य विवरण शामिल हैं। जांच के अनुसार पैकेट पर दर्ज क्यूआर कोड कथित तौर पर किसी दूसरी पंजीकृत इकाई से संबंधित पाया गया।
10.72 लाख किलो सेब का उत्पादन प्रभावित
शोपियां में अब तक के आकलन में 6593 पेड़ और 335.75 कनाल क्षेत्र प्रभावित पाया गया है। अनुमान है कि इससे करीब 10.72 लाख किलोग्राम सेब उत्पादन का नुकसान हुआ है। वित्तीय नुकसान का प्रारंभिक अनुमान करीब 4.42 करोड़ रुपये लगाया गया है।
अनंतनाग में हुए नुकसान का पूरा आकलन अभी किया जा रहा है।
एफआईआर दर्ज, सप्लाई चेन की होगी जांच
मामले में शोपियां पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि एसपी-1902 बैच का निर्माण और पैकेजिंग कहां हुई, यह बाजार और बागवानों तक कैसे पहुंचा और इस मामले में कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं।
सरकार ने प्रभावित बागवानों को संभावित राहत का रास्ता भी खुला रखा है। वैज्ञानिक जांच और नुकसान के सत्यापन के बाद मौजूदा नियमों और योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता देने पर फैसला लिया जाएगा।
फिलहाल प्रयोगशाला रिपोर्ट, जब्त सामग्री और बागानवार नुकसान के आकलन को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इन रिपोर्टों के बाद ही सेब गिरने की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी को लेकर तस्वीर साफ होगी।



