JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल | जम्मू
जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2012 से 2016 के बीच जारी किए गए करीब 2.74 लाख हथियार लाइसेंस का मामला एक बार फिर चर्चा में है। आरोप है कि निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं को दरकिनार कर बड़ी संख्या में हथियारों के लाइसेंस ऐसे लोगों को जारी किए गए, जो जम्मू-कश्मीर के निवासी नहीं थे। इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से वर्ष 2019 से की जा रही है।
यह मामला पहली बार वर्ष 2017 में राजस्थान पुलिस की जांच के दौरान सामने आया था। राजस्थान एटीएस हथियार लाइसेंस से जुड़ी अनियमितताओं की जांच कर रही थी। इसी दौरान उसे जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों से जारी किए गए ऐसे लाइसेंसों की जानकारी मिली, जो राजस्थान सहित देश के दूसरे राज्यों में रहने वाले लोगों के नाम पर जारी किए गए थे।
राजस्थान जांच से सामने आया मामला
जांच आगे बढ़ने पर जम्मू-कश्मीर से जारी हथियार लाइसेंसों को लेकर कई गंभीर सवाल उठे। राजस्थान पुलिस ने इस संबंध में जम्मू-कश्मीर सरकार को पत्र भेजकर जानकारी मांगी। इसके बाद प्रदेश के कई जिलों में जारी लाइसेंसों की जांच शुरू हुई।
जांच के दायरे में डोडा, रामबन, ऊधमपुर, किश्तवाड़, राजौरी, कुपवाड़ा, बारामुला, शोपियां और पुलवामा समेत कई जिले आए।
राजस्थान एटीएस के अनुसार, केवल डोडा, रामबन और ऊधमपुर जिलों में जारी किए गए 1,43,013 लाइसेंसों में से 1,32,321 लाइसेंस ऐसे लोगों के नाम पर पाए गए, जो जम्मू-कश्मीर के बाहर रहते थे। इस आंकड़े ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।
अधिकारियों और हथियार डीलरों की भूमिका भी जांच के घेरे में
सीबीआई की जांच में तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेटों, डिप्टी कमिश्नरों और लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों ने कथित आर्थिक लाभ के बदले नियमों का पालन किए बिना लाइसेंस जारी किए।
इसके अलावा हथियार डीलरों और संबंधित अधिकारियों के बीच कथित वित्तीय लेन-देन की भी जांच की गई। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में किस स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई और इसके पीछे आर्थिक लेन-देन की क्या भूमिका थी।
आठ IAS अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन मंजूरी का मामला
इस मामले में सीबीआई ने आठ आईएएस अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए मंजूरी मांगी है। हालांकि, कुछ मामलों में गृह मंत्रालय की ओर से अतिरिक्त दस्तावेज और कथित मनी ट्रेल से जुड़े स्पष्टीकरण मांगे गए हैं।
इसका मतलब यह है कि मामले में जांच एजेंसी की कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अभी भी महत्वपूर्ण चरण में है।
हाई कोर्ट भी कर रहा है मामले की निगरानी
करीब एक दशक पुराने इस मामले की जांच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट भी मामले की प्रगति पर नजर रख रहा है। ऐसे में अब जांच और अभियोजन मंजूरी से जुड़े अगले कदम पर सबकी नजर बनी हुई है।
2.74 लाख लाइसेंस से जुड़ा यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जांच का एक बड़ा हिस्सा इस सवाल पर केंद्रित है कि जम्मू-कश्मीर के बाहर रहने वाले लोगों को यहां के जिलों से हथियार लाइसेंस किस प्रक्रिया के तहत जारी किए गए और इसमें संबंधित अधिकारियों तथा हथियार कारोबारियों की क्या भूमिका रही।
फिलहाल सीबीआई की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है। मामले में अंतिम जिम्मेदारी और आरोपों की पुष्टि संबंधित न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।


