JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल | जम्मू
करीब आठ महीने तक जन सुरक्षा अधिनियम के तहत जेल में रहने के बाद आम आदमी पार्टी के विधायक मेहराज मलिक मंगलवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हुए। विधानसभा में उनकी वापसी का अंदाज भी चर्चा में रहा। मेहराज मलिक काला चश्मा, टोपी और टी-शर्ट पहनकर सदन में पहुंचे।
प्रश्नकाल के दौरान बिजली बिल माफी योजना से जुड़े सवाल पर पूरक प्रश्न पूछने की अनुमति नहीं मिलने के बाद मेहराज मलिक ने आपत्ति जताई। इस दौरान उनकी सत्तापक्ष के कुछ विधायकों के साथ तीखी बहस हुई और सदन में कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
दरअसल, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भाजपा विधायक विक्रम रंधावा के बिजली बिल एमनेस्टी से संबंधित सवाल का जवाब देकर अपनी सीट पर बैठे थे। इसी मुद्दे पर मेहराज मलिक ने पूरक सवाल पूछने का प्रयास किया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी।
इसके बाद मेहराज मलिक अपनी सीट से उठकर सदन के वेल की ओर जाने लगे। मार्शलों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। स्पीकर ने भी उन्हें कई बार अपनी सीट पर वापस जाने को कहा। इस दौरान सत्तापक्ष के विधायक हसनैन मसूदी और नजीर अहमद गुरेजी ने भी उन्हें बैठने के लिए कहा, जिस पर बहस हो गई।
स्थिति बिगड़ती देख कांग्रेस विधायक चौधरी इफ्तिखार अहमद और अवामी इत्तिहाद पार्टी के विधायक शेख खुर्शीद ने भी मेहराज मलिक को शांत कराने का प्रयास किया। विधानसभा अध्यक्ष ने मेहराज मलिक के व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी और सदन की मर्यादा बनाए रखने की बात कही।
स्पीकर ने स्पष्ट किया कि पूरक सवाल पूछने का अधिकार उस सदस्य को होता है, जिसने मूल प्रश्न उठाया हो। इसके बाद भी मेहराज मलिक अपनी बात पर कायम रहे और उन्होंने सदन में कहा कि ‘सदन किसी की जागीर नहीं है।’
बाद में मेहराज मलिक ने सदन से वॉकआउट कर दिया। अप्रैल 2025 में जन सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिए जाने के कारण वह पिछले शरदकालीन विधानसभा सत्र में शामिल नहीं हो सके थे। मंगलवार को लंबे अंतराल के बाद उन्होंने विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लिया।
मेहराज मलिक जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आम आदमी पार्टी के एकमात्र विधायक हैं। विधानसभा में उनके इस अंदाज और बिजली बिल माफी योजना को लेकर हुए हंगामे की चर्चा सदन के बाहर भी देखने को मिली।



