JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरदकालीन सत्र की शुरुआत सोमवार को जोरदार हंगामे के साथ हुई। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों के बीच अलग-अलग मुद्दों को लेकर नारेबाजी देखने को मिली। भाजपा विधायकों ने सदन के बीचोंबीच बैठकर धरना दिया, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने ‘स्टेटहुड बहाल करो’ के नारे लगाए।
हंगामे के दौरान स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई, जब कुछ विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और भिड़ंत जैसी स्थिति बन गई। हालात को संभालने के लिए मार्शलों को सदन में उतरना पड़ा और उन्होंने सदस्यों को अलग किया।
भाजपा विधायक पोस्टर लेकर पहुंचे सदन में
सत्र के पहले दिन भाजपा विधायक अपने साथ पोस्टर लेकर विधानसभा पहुंचे। इन पोस्टरों के माध्यम से उन्होंने एनएचएम कर्मचारियों, बिजली उपभोक्ताओं और दैनिक वेतनभोगियों से जुड़े मुद्दों को उठाया।
भाजपा सदस्यों ने एनएचएम कर्मचारियों के साथ न्याय करने, बिजली के बढ़े हुए टैरिफ को वापस लेने और दैनिक वेतनभोगियों को नियमित करने जैसी मांगों को प्रमुखता से उठाया। इन मुद्दों को लेकर भाजपा विधायकों ने सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की।
NHM और डेली वेजर्स के मुद्दे पर विरोध
भाजपा विधायकों ने एनएचएम कर्मचारियों की लंबित समस्याओं और दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण का मुद्दा सदन में उठाया। उनका कहना था कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों से जुड़े मामलों का समाधान किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग भी सदन में उठाई गई। भाजपा विधायकों ने बिजली उपभोक्ताओं पर बढ़े आर्थिक बोझ का मुद्दा उठाते हुए सरकार से टैरिफ पर पुनर्विचार करने की मांग की।
‘स्टेटहुड बहाल करो’ के नारे
दूसरी ओर, नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने सदन में जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर नारे लगाए। इससे विधानसभा के पहले ही दिन राजनीतिक माहौल काफी गर्म दिखाई दिया।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इस दौरान अपनी सीट पर बैठे रहे और सदन में चल रही गतिविधियों को देखते रहे।
स्पीकर ने विधायकों को दी चेतावनी
लगातार नारेबाजी और हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने को कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विधायक सदन के बीच खड़े होकर नारेबाजी करते रहे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, स्पीकर की चेतावनी के बाद भी कुछ समय तक हंगामा जारी रहा और विधायक अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे।
पहले दिन ही कई बड़े मुद्दे सामने
विधानसभा के इस सत्र में रोजगार, दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण, एनएचएम कर्मचारियों की समस्याओं, बिजली दरों, आउटसोर्स कर्मचारियों और राज्य के दर्जे जैसे मुद्दे प्रमुख रहने की संभावना है।
पहले ही दिन सदन में जिस तरह से अलग-अलग मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला, उससे आने वाले दिनों में विधानसभा की कार्यवाही के दौरान इन मुद्दों पर बहस और राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के संकेत मिले हैं।
विधानसभा के पहले दिन का घटनाक्रम यह भी दिखाता है कि रोजगार, कर्मचारियों से जुड़े मामले, बिजली दरें और जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे जैसे विषय इस सत्र में महत्वपूर्ण चर्चा का हिस्सा बने रह सकते हैं।


