JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू
लद्दाख के गांवों में जमीनी स्तर पर प्रशासन और आम लोगों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करने वाले गांव मुखियाओं के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में गांव के मुखियाओं के मासिक मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। अब उन्हें हर महीने 1,500 रुपये के बजाय 5,000 रुपये मानदेय दिया जाएगा।
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की मंजूरी के बाद मानदेय बढ़ाने का यह फैसला लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस निर्णय से पूरे लद्दाख में कार्यरत 247 गांव मुखियाओं को लाभ मिलेगा। करीब एक दशक के बाद उनके मानदेय में यह बढ़ोतरी की गई है।
233 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी
पहले गांव मुखियाओं को हर महीने 1,500 रुपये मानदेय मिलता था। अब इसे बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया गया है। यानी मासिक मानदेय में 3,500 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जो पुराने मानदेय की तुलना में 233 प्रतिशत से अधिक है।
संशोधित मानदेय जम्मू और कश्मीर लंबरदारी अधिनियम, 1972 तथा जम्मू और कश्मीर लंबरदारी नियम, 1980 के प्रावधानों के तहत तय किया गया है। ये प्रावधान लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश पर भी लागू होते हैं।
लद्दाख में गांव के मुखियाओं को स्थानीय स्तर पर ‘गोबा’ कहा जाता है। इनकी भूमिका गांवों से जुड़े स्थानीय मुद्दों और प्रशासन तक लोगों की समस्याएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
लंबे समय से की जा रही थी मानदेय बढ़ाने की मांग
अधिकारियों के मुताबिक गांव मुखियाओं की ओर से लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग की जा रही थी। लद्दाख के विभिन्न गांवों के दौरे के दौरान उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को भी इस संबंध में ज्ञापन सौंपे गए थे।
19 सितंबर को अलग-अलग गांवों के नंबरदारों का एक प्रतिनिधिमंडल भी उपराज्यपाल से मिला था। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी जिम्मेदारियों और मौजूदा मानदेय को लेकर अपनी समस्याएं सामने रखते हुए इसमें बढ़ोतरी की मांग की थी।
गांव और प्रशासन के बीच अहम कड़ी
उपराज्यपाल ने गांव मुखियाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे ग्रामीणों के साथ सीधे संपर्क में रहते हैं और प्रशासन तथा गांवों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि गांवों में मुखियाओं की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर पानी से जुड़े कई स्थानीय मुद्दों को सामने लाने और उनके समाधान में मदद मिली है।
उपराज्यपाल के अनुसार, मानदेय में बढ़ोतरी का उद्देश्य उनकी जिम्मेदारियों और लंबे समय से चली आ रही मांग को मान्यता देना है। इससे दूरदराज और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में सहभागी शासन व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
विकास योजनाओं को गांवों तक पहुंचाने में भूमिका
प्रशासन का मानना है कि गांव मुखियाओं की स्थानीय स्तर पर मौजूदगी के कारण सरकारी योजनाओं और सेवाओं से जुड़े मुद्दों को तेजी से सामने लाया जा सकता है। इसके अलावा गांवों में विकास कार्यों, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय समस्याओं की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाने में भी उनकी भूमिका रहती है।
मानदेय बढ़ाए जाने के बाद अब 247 गांव मुखियाओं को हर महीने 5,000 रुपये मिलेंगे। प्रशासन की ओर से उम्मीद जताई गई है कि इससे गांवों में स्थानीय प्रतिनिधियों की भूमिका और मजबूत होगी तथा सरकारी योजनाओं एवं कल्याणकारी सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में भी सहयोग मिलेगा।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब लद्दाख के दूरदराज क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गांव मुखियाओं को मिलने वाले बढ़े हुए मानदेय से उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग भी पूरी हुई है।



