Saturday, November 7, 2026
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15 लाख के मुआवजे से नहीं भरा जख्म, सोनम वांगचुक बोले- पहले न्याय मिले, फिर मुआवजे की बात हो

JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू

लद्दाख में 24 सितंबर को हुए हिंसक घटनाक्रम को लेकर एक बार फिर विवाद तेज हो गया है। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय सक्सेना की ओर से हिंसा में जान गंवाने वालों के परिवारों को 15 लाख रुपये और घायलों को तीन लाख रुपये तक की सहायता राशि देने की घोषणा के बाद शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। वांगचुक ने कहा कि केवल मुआवजा घोषित कर देने से उन परिवारों का दर्द और घटना को लेकर उठे सवाल खत्म नहीं हो जाते।

वांगचुक ने सामाजिक माध्यम पर जारी अपने वीडियो में कहा कि मुआवजे की घोषणा सुनकर उन्हें खुशी नहीं हुई, बल्कि उनका सिर शर्म से झुक गया। उनका कहना है कि जिस घटना में लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए, उसमें सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि आखिर जिम्मेदार कौन था और लोगों पर कार्रवाई किस परिस्थिति में हुई।

गोली चलाने की कार्रवाई पर उठाए सवाल

सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान सड़क पर मौजूद ज्यादातर लोग निहत्थे थे। उनके मुताबिक, प्रदर्शनकारियों पर एके-47 से गोलियां चलाई गईं। उन्होंने इस कार्रवाई को सीधे तौर पर हत्या करार देते हुए कहा कि इस घटना में पांच लोगों की मौत हुई और 80 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए।

वांगचुक ने यह भी कहा कि हिंसा में ऐसे पूर्व सैनिक भी प्रभावित हुए, जिन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा देश की सीमाओं की सुरक्षा में लगाया था। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के परिवारों के दर्द को केवल आर्थिक सहायता देकर खत्म नहीं किया जा सकता।

न्यायिक जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

वांगचुक ने न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि अगर जांच आयोग की रिपोर्ट सामने आती है तो घटना के पीछे की पूरी सच्चाई लोगों के सामने आ सकती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट को दबा दिया गया और जिन अधिकारियों की निगरानी में घटनाक्रम हुआ, उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें लद्दाख से बाहर भेजकर दिल्ली में महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारियां दी गईं।

बोले- मुआवजे से ज्यादा जरूरी है जवाबदेही

सोनम वांगचुक के बयान का मुख्य केंद्र मुआवजे से ज्यादा जवाबदेही और न्याय है। उनका कहना है कि मृतकों और घायलों के परिवारों को उचित आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए, लेकिन इसके साथ यह भी सामने आना चाहिए कि हिंसा की स्थिति क्यों बनी, गोली चलाने का आदेश किस स्तर पर लिया गया और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी थी।

उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों के मुद्दों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। वांगचुक ने चेतावनी दी कि अगर पीड़ित परिवारों को न्याय और उचित मुआवजा नहीं मिला तो वह इस घटना से जुड़े तथ्यों और पीड़ितों की आवाज को देश और दुनिया के सामने उठाते रहेंगे।

लद्दाख के मुद्दों पर फिर बढ़ सकती है हलचल

मुआवजे की घोषणा के बाद वांगचुक की आपत्ति ने लद्दाख के राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। लद्दाख में लंबे समय से संवैधानिक सुरक्षा, भूमि और रोजगार से जुड़े अधिकारों सहित कई मांगें उठती रही हैं। ऐसे में हिंसा की घटना और उसके बाद की कार्रवाई को लेकर जवाबदेही की मांग आने वाले दिनों में फिर जोर पकड़ सकती है।

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