JNM संवाददाता श्रीनगर
हरदीप जमवाल

अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार सरकार ने जमीन खरीद से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक किए हैं—और ये आंकड़े हैरान करने वाले हैं। विधानसभा में विधायक शेख एहसान अहमद के प्रश्न के जवाब में बताया गया कि बीते छह वर्षों में जम्मू-कश्मीर में कुल 631 बाहरी नागरिकों ने जमीन खरीदी है, और इन सौदों का कुल मूल्य 130 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार जम्मू संभाग पहले पायदान पर रहा है, जहाँ 378 बाहरी व्यक्तियों ने 212 कनाल जमीन खरीदी, जिसकी कीमत करीब ₹90.48 करोड़ आंकी गई है। वहीं कश्मीर संभाग में 253 बाहरी नागरिकों ने 173 कनाल जमीन खरीदी है, जिसका मूल्य करीब ₹39.49 करोड़ है।
सरकार ने साफ किया कि 5 अगस्त 2019 को हुए सांविधानिक बदलावों के बाद पहली बार गैर-निवासी नागरिकों को जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने का अधिकार मिला। इसके बाद से वाणिज्यिक और आवासीय दोनों तरह की संपत्तियों की खरीद में बाहरी लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। अलग-अलग जिलों में ये खरीदारी नए व्यापारिक अवसरों से लेकर निजी निवेश तक कई वजहों से हुई है।
इन आंकड़ों ने न सिर्फ राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है, बल्कि आम लोगों में भी यह सवाल उठा दिया है कि आने वाले वर्षों में जम्मू-कश्मीर की ज़मीन-नीति, जनसांख्यिकी और निवेश का स्वरूप किस दिशा में जाएगा। सरकार के अनुसार, सभी सौदे मौजूदा कानूनों के तहत, पूरी पारदर्शिता के साथ दर्ज किए गए हैं।
यह खुलासा एक बार फिर इस बहस को जीवित कर देता है कि जम्मू-कश्मीर में बाहरी निवेश कितना स्वागत योग्य है और इसका स्थानीय लोगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा—पर इतना साफ है कि तस्वीर अब बदल चुकी है और बदलाव की रफ़्तार पहले से कहीं तेज़ हो चुकी है।

