JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल,जम्मू
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बिजली की दरों में हाल ही में की गई बढ़ोतरी को सरकार की मजबूरी बताया है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार बिजली दरों में सबसे कम बढ़ोतरी की गई है।
पत्रकारों से बातचीत में उमर अब्दुल्ला ने बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर सरकार की आलोचना करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आज उनकी सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, वे भी पहले सत्ता में रह चुके हैं और उनके कार्यकाल में भी बिजली की दरों में बढ़ोतरी की गई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के कार्यकाल में बिजली की दरों में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी। इससे चार वर्ष पहले भी 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। इसके मुकाबले उनकी सरकार ने चार साल बाद केवल 6 प्रतिशत बिजली दरें बढ़ाई हैं।
उन्होंने कहा कि इस दौरान महंगाई के साथ-साथ तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी काफी वृद्धि हुई है। सरकार ने बिजली की दरों में बढ़ोतरी को न्यूनतम रखने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि सरकार इस बढ़ोतरी से खुश नहीं है, बल्कि यह एक मजबूरी थी।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि बिजली के पारेषण और वितरण में होने वाले नुकसान को जितना कम किया जाएगा, भविष्य में बिजली की दरों में बढ़ोतरी जैसे कदम उठाने की जरूरत उतनी ही कम होगी।
गरीब परिवारों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी यह वादा नहीं किया था कि बिजली की दरों में भविष्य में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि मुफ्त बिजली योजना के तहत सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करके गरीब परिवारों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की योजना लागू की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजली की दरों में बढ़ोतरी और गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली देने की योजना का आपस में कोई संबंध नहीं है।
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकियों पर गंभीर चिंता
उमर अब्दुल्ला ने हाल में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही धमकियों को गंभीर मामला बताया। उन्होंने पुलिस, सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों से मामले की गहन जांच करने और इन धमकियों को हल्के में नहीं लेने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धमकियां कहां से आ रही हैं, इसका पता लगाया जाना जरूरी है और सभी कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की बड़ी जिम्मेदारी है।
उन्होंने अतीत में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों की हुई लक्षित हत्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रशासन को पहले से सतर्क रहना चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोका जा सके।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि करीब चार वर्ष पहले कुछ पंडित कर्मचारियों को निशाना बनाया गया था और उस समय काफी नुकसान हुआ था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीधे उनकी सरकार की नहीं, बल्कि उपराज्यपाल के अधीन व्यवस्था की है।
मंत्रिमंडल में फेरबदल पर भी बोले मुख्यमंत्री
मंत्रिमंडल के विस्तार या फेरबदल को लेकर चल रही चर्चाओं पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार में किसी तरह का संकट नहीं है और सरकार का कामकाज सामान्य रूप से चल रहा है।
उन्होंने कहा कि जब मंत्रिमंडल में फेरबदल करना होगा, तब किया जाएगा। उमर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल इतना कहा था कि 15 अगस्त से पहले मंत्रिमंडल में फेरबदल नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि फेरबदल कब और किन परिस्थितियों में होगा, इसका फैसला वह स्वयं करेंगे। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार का कामकाज लगातार जारी है और मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर किसी तरह के संकट की स्थिति नहीं है।



