Saturday, October 10, 2026
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चतरू किश्तवाड़ में नाबालिग की मौत मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का बड़ा एक्शन, मुख्य सचिव, डीजीपी और एसएसपी को नोटिस

JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू

किश्तवाड़ जिले के चतरू क्षेत्र में एक नाबालिग गुज्जर अनुसूचित जनजाति की बच्ची के कथित यौन उत्पीड़न और मौत के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने गंभीर संज्ञान लिया है। आयोग ने जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और किश्तवाड़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर मामले से जुड़ी पूरी जानकारी और अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पांच दिनों के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

यह कार्रवाई ट्राइबल गुज्जर-बक्करवाल वेलफेयर फाउंडेशन की ओर से सदस्य ट्रस्टी मास्टर कबीर अहमद द्वारा आयोग के समक्ष दायर शिकायत के आधार पर की गई है। आयोग ने 25 अगस्त 2026 को जारी नोटिस में कहा है कि वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338ए के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए किश्तवाड़ के चतरू मामले की जांच और पूछताछ करेगा।

आयोग ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से शिकायत में लगाए गए आरोपों से संबंधित तथ्य, जानकारी, दस्तावेज और अब तक की गई कार्रवाई का विवरण पांच दिनों के भीतर देने को कहा है। आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं मिला तो वह संविधान के अनुच्छेद 338ए के तहत प्राप्त सिविल न्यायालय जैसी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारियों को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से या अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से पेश होने के लिए समन जारी किया जा सकता है।

किश्तवाड़ के चतरू में सामने आए इस मामले में फाउंडेशन की शिकायत का एक प्रमुख मुद्दा यह है कि मृतक बच्ची गुज्जर अनुसूचित जनजाति से संबंधित थी, लेकिन मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 की संबंधित धाराएं कथित तौर पर लागू नहीं की गईं।

फाउंडेशन ने मांग की है कि मृतक बच्ची की अनुसूचित जनजाति स्थिति का सत्यापन किया जाए और आरोपियों की सामाजिक स्थिति की भी जांच की जाए। इसके साथ ही यह निर्धारित किया जाए कि चतरू, किश्तवाड़ मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की कौन-कौन सी धाराएं लागू होती हैं।

फाउंडेशन के अनुसार, पुलिस थाना चतरू, जिला किश्तवाड़ में प्राथमिकी संख्या 34/2026 दर्ज की गई है। इसमें खालिद हुसैन और तारिक हुसैन को आरोपी बनाया गया है। शिकायत में नाबालिग के साथ कथित रूप से बार-बार यौन उत्पीड़न, उसके गर्भवती होने, कथित रूप से गर्भ समाप्त करने के प्रयास और इसके बाद उसकी मौत से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

शिकायत में धमकी देने, पैसे का प्रलोभन देने, मामले को सामाजिक स्तर पर दबाने के कथित प्रयास तथा घटना की जानकारी होने के बावजूद इसकी सूचना नहीं देने जैसे आरोपों की भी जांच की मांग की गई है। फाउंडेशन ने उन लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है, जिन्होंने कथित तौर पर अपराध को छिपाने, आरोपियों की मदद करने या मामले में समझौता कराने का प्रयास किया हो।

फाउंडेशन ने मृतक बच्ची के परिवार और संभावित गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है। इसके साथ ही मामले से जुड़े चिकित्सा रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री को सुरक्षित रखने तथा परिवार को कानून के तहत मिलने वाले मुआवजे, राहत और पुनर्वास संबंधी लाभ उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की कार्रवाई का स्वागत करते हुए ट्राइबल गुज्जर-बक्करवाल वेलफेयर फाउंडेशन ने कहा कि आयोग की त्वरित प्रतिक्रिया से मृतक बच्ची के परिवार की न्याय को लेकर उम्मीद मजबूत हुई है। फाउंडेशन ने इसे किश्तवाड़ के चतरू मामले में जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

फाउंडेशन ने उम्मीद जताई है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन और पुलिस अधिकारी आयोग के नोटिस का निर्धारित समय में जवाब देंगे और चतरू, किश्तवाड़ मामले से जुड़े सभी तथ्यों को आयोग के सामने रखेंगे। साथ ही परिवार की सुरक्षा, साक्ष्यों के संरक्षण और निष्पक्ष एवं व्यापक जांच के लिए सभी आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

फाउंडेशन ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य पुलिस जांच में किसी प्रकार का हस्तक्षेप करना नहीं है। उसकी मुख्य चिंता यह है कि मामले में लागू होने वाली कोई भी कानूनी सुरक्षा अनदेखी न हो, जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच हो और मृतक बच्ची तथा उसके परिवार को न्याय मिले।

ट्राइबल गुज्जर-बक्करवाल वेलफेयर फाउंडेशन ने कहा कि वह किश्तवाड़ के चतरू मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के समक्ष चल रही कार्यवाही और जांच पर नजर रखेगा तथा आवश्यक सामग्री सक्षम अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करता रहेगा। फाउंडेशन ने मृतक बच्ची के परिवार के अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और पुनर्वास के लिए मामले को उसके कानूनी और तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

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