JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू
जम्मू-कश्मीर में वर्षों से अस्थायी और कैजुअल आधार पर काम कर रहे कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। सरकार की ओर से चलाए गए आधार आधारित बायोमेट्रिक पहचान और स्किल-प्रोफाइलिंग अभियान के तहत जम्मू-कश्मीर में 1,00,501 कैजुअल और अन्य श्रमिकों का पंजीकरण किया गया है। यह आंकड़ा विधानसभा में विधायक वहीद उर रहमान पारा के एक अतारांकित प्रश्न के जवाब में सरकार की ओर से साझा किया गया।
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक पंजीकृत कर्मचारियों में 69,696 कैजुअल लेबर, 8,534 सीजनल लेबर और 8,836 डेली रेटेड वर्कर्स तथा वर्क-चार्ज्ड कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा 3,092 पार्ट टाइम वर्कर्स, 156 सीआईसी ऑपरेटर, 5,757 एनवाईसी, हमाल और ड्राइवर भी इस रिकॉर्ड में शामिल हैं। वहीं 1,929 कर्मचारी हॉस्पिटल डेवलपमेंट फंड के तहत कार्यरत हैं। इसके अलावा अन्य श्रेणियों के कर्मचारी भी इस पंजीकरण अभियान का हिस्सा बने हैं।
जल शक्ति विभाग में सबसे ज्यादा कर्मचारी
विभागवार आंकड़ों पर नजर डालें तो जल शक्ति विभाग तथा सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग में सबसे अधिक 38,585 कर्मचारियों का पंजीकरण हुआ है।
इसके बाद पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट की विभिन्न विंग में 13,616, जबकि शिक्षा विभाग में 12,646 कर्मचारियों का रिकॉर्ड तैयार किया गया है।
वन विभाग में 8,317, लोक निर्माण विभाग यानी आरएंडबी में 6,801, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में 4,868 और कृषि विभाग में 4,776 कर्मचारियों का पंजीकरण किया गया है।
जम्मू जिला सबसे आगे
जिलावार आंकड़ों में जम्मू जिला 13,425 पंजीकृत कर्मचारियों के साथ सबसे आगे है। इसके बाद श्रीनगर में 11,825 और अनंतनाग में 8,823 कर्मचारियों का पंजीकरण हुआ है।
बारामूला में 7,724, बडगाम में 5,772, पुलवामा में 5,651, कुपवाड़ा में 5,547 और राजौरी में 5,191 कर्मचारी पंजीकृत किए गए हैं।
इसके अलावा गांदरबल में 4,056, डोडा में 3,856, कुलगाम में 3,321, रियासी में 3,210, बांडीपोरा में 2,771, किश्तवाड़ में 2,754, ऊधमपुर में 2,518 और पुंछ में 2,455 कर्मचारियों का रिकॉर्ड तैयार किया गया है।
वहीं कारगिल में 1,791, लेह में 1,021 और सिविल सचिवालय/नई दिल्ली में 222 कर्मचारी इस सूची में शामिल हैं।
नियमितीकरण पर क्या है सरकार का जवाब?
एक लाख से ज्यादा कर्मचारियों का रिकॉर्ड तैयार होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उनके नियमितीकरण को लेकर है। सरकार ने विधानसभा में बताया कि एसआरओ-520, 21 अक्टूबर 2017 के तहत कैजुअल और अन्य श्रमिकों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नियमित नियुक्ति देने का प्रावधान था।
हालांकि, बाद में सामने आए कानूनी फैसलों को देखते हुए इस नीति की समीक्षा की गई। सरकार के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में एसआरओ-520 के तहत किसी भी कैजुअल या अन्य कर्मचारी का नियमितीकरण नहीं किया गया।
19 मार्च 2025 को बनी समिति
नियमितीकरण के मुद्दे पर आगे का रास्ता तलाशने के लिए सरकार ने 19 मार्च 2025 को एक समिति का गठन किया था। इस समिति को अलग-अलग श्रेणियों के कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े मामलों की जांच करने और व्यापक समाधान सुझाने की जिम्मेदारी दी गई है।
समिति इन मामलों को मानवीय, कानूनी और वित्तीय पहलुओं से देखेगी। सरकार के मुताबिक सेवा नियमों, अदालतों के फैसलों, कानूनी प्रभाव और नियमितीकरण से पड़ने वाले वित्तीय बोझ जैसे कई पहलुओं पर विचार करना जरूरी है।
सरकार ने कहा है कि समिति की सिफारिशों के आधार पर आगे उचित कदम उठाया जाएगा। साथ ही अंतिम फैसला ऐसा होना चाहिए जो कानूनी रूप से उचित और वित्तीय रूप से टिकाऊ हो।
ऐसे में एक लाख से ज्यादा कैजुअल और अन्य कर्मचारियों का रिकॉर्ड तो सरकार के पास तैयार हो चुका है, लेकिन वर्षों से अस्थायी आधार पर काम कर रहे इन कर्मचारियों को नियमित नौकरी कब मिलेगी, इस सवाल का जवाब अभी समिति की सिफारिशों और सरकार के अगले फैसले पर टिका हुआ है।



