JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल | जम्मू
जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी प्रस्ताव पर भाजपा के विरोध को लेकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के इस रुख से जम्मू के लोगों के सामने उसका पक्ष स्पष्ट हो गया है और जनता वर्ष 2029 में इसका जवाब देगी।
विधानसभा में भाजपा की आपत्तियों और वाकआउट के बीच राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव पारित होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने इस प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के उसके आश्वासन की याद दिलाई है।
दो साल बाद भी राज्य का दर्जा बहाल नहीं
सुरिंदर चौधरी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने में अब तक करीब दो साल बीत चुके हैं। उनके मुताबिक, राज्य का दर्जा न होने का असर शासन और प्रशासन की व्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र के सामने राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई गई है।
2019 के फैसले पर भी उठाए सवाल
उपमुख्यमंत्री ने वर्ष 2019 के जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य का दर्जा बदलने से पहले क्या लोगों या संबंधित पक्षों से सलाह ली गई थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि उस समय संविधान का पालन किस तरह किया गया।
2029 को लेकर भाजपा पर निशाना
चौधरी ने कहा कि भाजपा को अपने मौजूदा रुख का जवाब वर्ष 2029 में जनता को देना होगा। उन्होंने राज्य में मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था की सीमाओं का भी जिक्र किया और कहा कि कई महत्वपूर्ण संस्थान मुख्यमंत्री के सीधे नियंत्रण में नहीं हैं।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को ‘शहजादा’ कहने पर भी जवाब
विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा द्वारा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को ‘शहजादा’ कहे जाने के सवाल पर भी उपमुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पूरे जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
चौधरी के मुताबिक, राज्य का दर्जा बहाल होने के बाद विधानसभा के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के लोग अपने फैसले स्वयं लेने की अधिक सक्षम स्थिति में होंगे। राज्य का दर्जा बहाली का मुद्दा अब विधानसभा की कार्यवाही के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर की राजनीति में भी प्रमुख चर्चा का विषय बन गया है।


