JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल | जम्मू
जम्मू-कश्मीर में मस्जिदों में जुमे की नमाज के दौरान दिए जाने वाले खुतबों (धार्मिक उपदेशों) के विषय तय करने की वक्फ बोर्ड की पहल पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस पहल पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे मुस्लिम समुदाय के धार्मिक मामलों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का हस्तक्षेप बताया है। उन्होंने वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष डॉ. सैयद दरख्शां अंद्राबी से इस प्रयास को तुरंत रोकने की मांग की है।
उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुस्लिमों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने की ऐसी कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें इस प्रयास को तुरंत रोक देना चाहिए।
क्या है वक्फ बोर्ड की पहल?
दरअसल, जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की ओर से मस्जिदों में जुमे के खुतबों के लिए सामाजिक और नैतिक विषय तय करने के उद्देश्य से धार्मिक विद्वानों की एक समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा गया था। इस पहल के तहत इमामों के उपदेशों में नशामुक्ति, सामाजिक बुराइयों की रोकथाम और शांति जैसे विषयों को शामिल करने पर जोर दिया जाना था।
वक्फ बोर्ड का मानना है कि इस व्यवस्था से समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाने, नशे जैसी समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। आलोचकों का मानना है कि खुतबों के विषय पहले से निर्धारित करने से इमामों और धार्मिक उपदेशकों की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने क्या कहा?
वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष डॉ. सैयद दरख्शां अंद्राबी ने इस पहल का बचाव करते हुए कहा कि खुतबे आस्था, समाज और क्षेत्र के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं से संबंधित पारंपरिक उपदेशों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
बोर्ड की ओर से इस पहल को सामाजिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने की कोशिश के रूप में पेश किया गया है।
धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर बढ़ी बहस
इस मामले ने जम्मू-कश्मीर में धार्मिक स्वतंत्रता, धार्मिक संस्थानों की भूमिका और सामाजिक सुधार के तरीकों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर वक्फ बोर्ड इसे समाज में शांति और नशामुक्ति का संदेश फैलाने की पहल बता रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके विरोधियों को आशंका है कि इससे धार्मिक उपदेशों की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की आपत्ति के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो गया है। अब इस मामले में वक्फ बोर्ड की आगे की कार्रवाई और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।



