श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा सत्र का सोमवार का दिन पूरी तरह गर्मजोशी और राजनीतिक तकरार से भरा रहा। सदन में विधायकों के वेतन-भत्तों की बढ़ोतरी, किराया प्राधिकरण विधेयक, राज्यसभा चुनाव परिणाम, और जनता से जुड़े ध्यानाकर्षण प्रस्तावों को लेकर पूरे दिन गरमागरम बहस चली। एक ओर सरकार अपनी नीतियों का बचाव करती दिखी, वहीं विपक्ष ने “जनहित के नाम पर अपने हित साधने” का आरोप लगाते हुए जमकर निशाना साधा।
वेतन और भत्तों पर सियासी गर्मी
सत्र की शुरुआत में ही सदन में सबसे ज़्यादा चर्चा विधायकों के वेतन और भत्तों पर रही। सदन समिति के चेयरमैन सुरजीत सिंह सलाथिया ने रिपोर्ट पेश की, जिसमें मौजूदा और पूर्व विधायकों के वेतन-भत्ते व पेंशन में संशोधन की सिफारिश की गई थी।
रिपोर्ट पेश होते ही विपक्षी बेंचों से शोर उठ खड़ा हुआ। पीडीपी और कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “महंगाई जनता झेले और बढ़ोतरी विधायक लें — ये कैसा न्याय?”
वहीं, एनसी के विधायकों ने पलटवार किया कि यह समिति सर्वदलीय थी और सिफारिशें “पारदर्शी” तरीके से बनीं। माहौल इतना गरमाया कि अध्यक्ष को कई बार सदन को शांत रहने की अपील करनी पड़ी।
किराया प्राधिकरण विधेयक हुआ पेश — विपक्ष बोला ‘ब्यूरोक्रेसी को मिली नई छड़ी’
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सदन में किराया प्राधिकरण की स्थापना से जुड़ा विधेयक पेश किया, जिसके जरिए राज्य में मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच विवादों का निपटारा त्वरित न्याय प्रणाली के तहत किया जाएगा।
सरकार ने इसे “जन-हितैषी” बिल बताया, लेकिन विपक्ष ने सवाल उठाए कि इससे ब्यूरोक्रेसी को जरूरत से ज़्यादा ताकत मिल जाएगी।
कांग्रेस के एक विधायक ने कहा, “सरकार किराया प्राधिकरण नहीं, शिकायत प्राधिकरण बना रही है।”
वहीं, उमर अब्दुल्ला ने जवाब में कहा कि “हमारे मकसद लोगों को राहत देना है, न कि विवाद बढ़ाना।”
ध्यानाकर्षण प्रस्तावों में जनता की समस्याओं की झड़ी
सदन में कई विधायक जनता से जुड़े मुद्दे लेकर सामने आए —
विधायक मीर सैफुल्लाह ने बर्फबारी के दौरान बंद इलाकों केरन और जुगमंड में रसद सप्लाई की कमजोर तैयारी पर सवाल उठाया।
निजामुद्दीन भट ने बांदीपोरा के एरिन ब्लॉक में हेपेटाइटिस-A और जलजनित रोगों से निपटने के लिए तुरंत मेडिकल टीम भेजने की मांग रखी।
कैसर जमशेद लोन ने लोलाब में पेयजल संकट को लेकर सरकार को घेरा।
रणवीर सिंह पठानिया ने उधमपुर नगरपालिका के मांड गांव में अवैध कूड़ा डंपिंग से फैल रही गंदगी और बीमारियों पर चिंता जताई।
इन प्रस्तावों पर सरकार ने आश्वासन दिया कि सभी बिंदुओं की समीक्षा कर कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
सेब बागवानों के दर्द की गूंज
विधायक हिलाल अकबर लोन ने नेशनल हाईवे के लगातार बंद रहने से सेब बागवानों को हुए भारी नुकसान का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मुआवजा देने में देरी किसानों के साथ अन्याय है।
कृषि मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि “सर्वे चल रहा है, और जल्द ही प्रभावित बागवानों को राहत दी जाएगी।”
हालांकि विपक्ष ने इस पर भी सवाल उठाया कि “हर बार सर्वे की बात होती है, राहत कभी नहीं पहुंचती।”
राज्यसभा चुनाव पर गरम बहस — भाजपा को मिले चार अतिरिक्त वोटों पर विपक्ष हमलावर
सत्र का सबसे विस्फोटक हिस्सा राज्यसभा चुनाव पर चर्चा रही। भाजपा को मिले चार अतिरिक्त विधायकों के समर्थन पर विपक्ष ने खुलकर सवाल उठाए।
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के सज्जाद लोन ने कहा कि “यह लोकतंत्र नहीं, सौदेबाज़ी का खेल था।”
वहीं भाजपा के विधायकों ने पलटवार करते हुए कहा कि “वोट वैचारिक आधार पर पड़े हैं, किसी दबाव या सौदे से नहीं।”
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पूरे घटनाक्रम पर संयमित रुख दिखाते हुए कहा, “लोकतंत्र में हर दल को अपना पक्ष रखने का अधिकार है, लेकिन मर्यादा में।”
दिनभर के सत्र का निचोड़
दिनभर की बहस, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक छींटाकशी के बीच विधानसभा का सोमवार का सत्र जनता के मुद्दों से ज्यादा सियासी रस्साकशी पर केंद्रित रहा।
जहां एक ओर विधायकों ने अपने वेतन को लेकर दिलचस्प एकजुटता दिखाई, वहीं जनता से जुड़े मसलों पर जवाबदेही को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष में दूरी साफ़ नजर आई।


