JNM संवाददाता
श्रीनगर
हरदीप जमवाल

जम्मू-कश्मीर के स्थापना दिवस समारोह में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के बयान ने राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। एलजी ने दो-टूक शब्दों में कहा कि निर्वाचित सरकार स्टेटहुड की बहाली को काम न करने का बहाना न बनाए, क्योंकि उनके पास तमाम शक्तियाँ मौजूद हैं।
लेकिन सियासी मैदान ने पल भर में मुरव्वत छोड़ दी। उमर अब्दुल्ला और डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने एलजी पर सीधा हमला बोलते हुए इसे सरकार पर नियंत्रण बनाए रखने की “जिद” करार दिया।
उमर की तल्खी— ‘उचित समय का पैमाना बताओ, हम इंतजार कर रहे हैं!’
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एलजी के बयान को कठघरे में रखते हुए कहा कि संसद ने जो वादा किया था—परिसीमन, फिर चुनाव, फिर राज्य का दर्जा—उसकी याद दिलाने की जरूरत है।
उन्होंने तंज कसते हुए पूछा—
“उचित समय कब आएगा? पैमाना क्या है? हमें बताओ कि कौन-सी मंज़िल पर पहुँचने के बाद स्टेटहुड लौटेगा।”
उन्होंने कहा कि जनता को बहकाया नहीं जा सकता, सरकार को पारदर्शिता रखनी चाहिए।
फारूक अब्दुल्ला का सीधा प्रहार— ‘एलजी झूठ बोलते हैं, फाइलें पास नहीं होने दी जातीं’
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने तो अपने तेवर और तीखे कर लिए। उन्होंने आरोप लगाया:
“एलजी सच नहीं बोलते। प्रशासन IAS और IPS के हाथों में है। कोई भी फाइल पास नहीं होने दी जाती। पूरा सिस्टम कंट्रोल में है।”
उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, जिससे सियासी तापमान और बढ़ गया है।
एलजी की दो-टूक— ‘जनकल्याण पर फोकस करो, स्टेटहुड का बहाना नहीं’
एलजी मनोज सिन्हा का कहना है कि
“निर्वाचित सरकार के पास सभी अधिकार हैं। स्टेटहुड न होने का बहाना बनाकर काम रोकना जनता से धोखा है।”
उन्होंने साफ संदेश दिया कि सरकार अपनी शक्तियों का इस्तेमाल केवल जनकल्याण के लिए करे।
राजनीति में फिर स्टेटहुड का तूफ़ान
एक तरफ सरकार का दावा—“काम करो, बहाने मत बनाओ”,
दूसरी तरफ विपक्ष का आरोप—“सत्ता पर पकड़ बनाए रखने की कोशिश”।
स्टेटहुड की बहाली का मुद्दा एक बार फिर जम्मू-कश्मीर की राजनीति को सियासी महाभारत की ओर धकेलता दिख रहा है।

