JNM संवाददाता जम्मू – हरदीप जमवाल

जम्मू। पांच साल बाद जम्मू में दरबार मूव की परंपरा एक बार फिर बहाल हुई तो शीतकालीन राजधानी की सड़कों पर रौनक लौट आई। सोमवार सुबह मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला जब नागरिक सचिवालय पहुंचे तो उनका स्वागत गार्ड ऑफ ऑनर से हुआ, वहीं रास्ते भर लोगों ने फूल बरसाकर उनका अभिवादन किया। वर्षों बाद बहाल हुई इस ऐतिहासिक परंपरा ने जम्मू में एक अलग ऊर्जा और उत्साह भर दिया है।
दरबार मूव बहाल: शीतकालीन राजधानी में फिर शुरू हुआ कामकाज
सोमवार से आगामी छह माह तक पूरा नागरिक सचिवालय जम्मू में ही कार्य करेगा। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय, पुलिस मुख्यालय और राजभवन सचिवालय भी यहां शिफ्ट हो गया है। दरबार मूव की बहाली ने शहर में प्रशासनिक गतिशीलता को नई गति दी है।
2021 में बंद हुई परंपरा, अब फिर मिली नई शुरुआत
दरबार मूव की परंपरा 2021 में यह कहते हुए रोक दी गई थी कि प्रशासन अब ‘ई-ऑफिस’ प्रणाली में सक्षम है और इससे लगभग 200 करोड़ रुपये की वार्षिक बचत होती है। लेकिन अब पांच साल बाद सरकार ने इसे फिर शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मुताबिक, “कुछ परंपराएँ सिर्फ पैसों से नहीं तोली जा सकतीं। यह हमारी सांस्कृतिक, सामाजिक और भावनात्मक एकता का प्रतीक है।”
डोगरा शासकों की विरासत
दरबार मूव की शुरुआत डोगरा शासक महाराजा गुलाब सिंह ने की थी। आज़ादी के बाद भी यह परंपरा जारी रही—सर्दियों में सचिवालय जम्मू और गर्मियों में श्रीनगर में कार्य करता रहा।
उमर अब्दुल्ला ने कहा—“यह परंपरा हमारी सौ साल से भी पुरानी विरासत है, जो दोनों प्रांतों को सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से जोड़ती है। इसे बंद करना एक गलती थी, और हमने उसे सुधार दिया है।”
जनता का प्यार: पाँच मिनट का सफर एक घंटे में बदल गया
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सुबह उन्हें जनता के स्नेह की गर्माहट महसूस हुई।
“मेरे घर से सचिवालय तक का पाँच मिनट का सफर आज एक घंटे में तय हुआ, क्योंकि लोग सड़कों पर उतरकर स्वागत कर रहे थे। यह दिखाता है कि जम्मू के लिए दरबार मूव कितना महत्वपूर्ण है।”
जम्मू की अर्थव्यवस्था में नई जान
व्यापारी वर्ग भी इस फैसले से बेहद उत्साहित है। दरबार मूव के कारण शहर में भीड़ बढ़ती है, किराये के मकानों, दुकानों, बाजारों, ट्रांसपोर्ट और होटल इंडस्ट्री में आमदनी बढ़ती है।
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, “जम्मू की रौनक दरबार मूव से ही लौटती है।”
कर्मचारियों की सुविधा के लिए विशेष टीम
कर्मचारियों की आवासीय और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ शुरुआती दिक्कतें आ सकती हैं, लेकिन इन्हें दूर करने के लिए विशेष टीम बना दी गई है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव शालीन काबरा इसकी निगरानी करेंगे और आने वाले दिनों में सारी व्यवस्थाएँ सुचारू कर दी जाएंगी।
राजनीतिक संदेश भी स्पष्ट
मुख्यमंत्री ने कहा—
“कुछ लोग हमेशा जम्मू बनाम कश्मीर का मुद्दा उठाकर दरार पैदा करना चाहते हैं। हम उस दूरी को खत्म करना चाहते हैं। दरबार मूव की बहाली उसी दिशा में एक बड़ा कदम है।”
इतिहास, विरासत और भावनाओं का संगम
दरबार मूव की वापसी सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर की साझा पहचान और एकता का प्रतीक बनकर सामने आई है।
उमर अब्दुल्ला के अनुसार, “जम्मू प्रभावित हुआ था जब दरबार मूव रोका गया था। आज उसकी खुशियाँ सड़कों पर साफ दिख रही हैं।”

