JNM संवाददाता: हरदीप जमवाल, जम्मू

जम्मू में सोमवार को जल शक्ति विभाग के डेलीवेजरों ने सरकार के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री आवास, मंत्रियों, विधायकों और शीर्ष अधिकारियों की पानी सप्लाई पूरी तरह रोक दी। कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी मांगों पर 30 वर्षों से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते यह सख्त कदम उठाना पड़ा।
डेलीवेजरों का समूह सोमवार दोपहर स्माधियां पंपिंग स्टेशन पहुंचा और मुख्य सप्लाई लाइन बंद कर दी। यह स्टेशन मुख्यमंत्री आवास, डिप्टी कमिश्नर कार्यालय और आसपास के VIP इलाकों की जलापूर्ति करता है। पंपिंग स्टेशन बंद होते ही VIP इलाकों के साथ-साथ आसपास के मोहल्लों में भी पानी की सप्लाई ठप हो गई।
“अब मजबूर होकर कड़े कदम उठाने पड़ रहे हैं” — फ्रंट की चेतावनी
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे होशियार सिंह चिब ने कहा कि “तीन दशक से हमारी अनदेखी हो रही है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का कोई असर नहीं हुआ। अब हमारी आवाज दबाई जा रही है, इसलिए हमें सप्लाई रोकने जैसे कदम उठाने पड़ रहे हैं। जरूरत पड़ी तो और पंपिंग स्टेशनों की सप्लाई भी रोकी जाएगी।”
उन्होंने कहा कि पहले कंपनी बाग की सप्लाई रोकने की तैयारी थी, लेकिन वहां से अस्पतालों को पानी जाता है, इसलिए संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए इस बार स्माधियां स्टेशन चुना गया।
सचिवालय घेराव रोका, लेकिन सप्लाई रोकने की रणनीति सफल
डेलीवेजरों ने BC रोड कार्यालय से सचिवालय घेराव की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें इंदिरा चौक और MLA हॉस्टल के पास रोक दिया और आगे बढ़ने नहीं दिया।
इसी बीच, प्रदर्शनकारियों की एक टीम नजर बचाकर स्माधियां पंपिंग स्टेशन में घुस गई और सप्लाई बंद करने में सफल रही।
सैकड़ों डेलीवेजर मौके पर मौजूद रहे और सरकार विरोधी नारे लगाकर विरोध जताते रहे। उनका कहना है कि 47 विभाग डेलीवेजरों पर निर्भर हैं, जबकि स्थायी कर्मचारी सिर्फ 5% हैं।
“मंत्रियों ने वेतन दोगुना करवा लिया, डेलीवेजर आज भी इंतजार में”
डेलीवेजर नेताओं ने कहा कि:
मंत्रियों व विधायकों ने अपना वेतन दोगुना करवा लिया
डेलीवेजरों का न्यूनतम वेतन तक तय नहीं हुआ
आठ महीने से कमेटी की रिपोर्ट दबाई जा रही है
मुख्यमंत्री ने 6 महीनों में रिपोर्ट लाने का वादा किया था, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ
जम्मू संभाग में जल शक्ति विभाग के करीब 22,000 डेलीवेजर वर्षों से अस्थायी तौर पर काम कर रहे हैं। कर्मचारियों ने 27 अक्टूबर को सरकार को 9 नवंबर तक का अल्टीमेटम भी दिया था। अब उन्होंने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने तक आंदोलन जारी रहेगा और सप्लाई बहाल नहीं की जाएगी।
डेलीवेजरों की प्रमुख मांगें
SRO-64 के तहत स्थायीकरण नीति लागू की जाए
लंबित 72 महीनों का बकाया जारी किया जाए
दिल्ली UT की तर्ज पर न्यूनतम वेतन लागू हो
5–6 वेतन चक्र पार कर चुके डेलीवेजरों को ऑनलाइन दर्ज किया जाए
लैंड डोनर से जुड़े मामलों का समाधान किया जाए
जम्मू में जल संकट का खतरा बढ़ा
पंपिंग स्टेशन बंद होने से VIP इलाकों के साथ कई रिहायशी मोहल्लों में भी जल संकट गहराने का खतरा है।
डेलीवेजरों ने साफ कहा है कि—
“जब तक सरकार वार्ता के लिए नहीं आती, जलापूर्ति बंद ही रहेगी।”

