Thursday, February 12, 2026
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PDP के भूमि अधिकार विधेयक और AAP विधायक की गिरफ्तारी पर गरमाया सदन JNM संवाददाता, श्रीनगर हरदीप जमवाल

जम्मू-कश्मीर विधानसभा का मंगलवार का सत्र भारी हंगामे और आरोप-प्रत्यारोप से घिरा रहा। विपक्षी दलों ने जहां PDP विधायक वाहीद-उर-रहमान पर्रा के भूमि अधिकार विधेयक को लेकर सरकार पर निशाना साधा, वहीं AAP विधायक मेहराज मलिक की गिरफ्तारी को लेकर भी सदन में जमकर शोर-शराबा हुआ।

भूमि अधिकार विधेयक पर टकराव

सत्र के दौरान PDP के विधायक वाहीद-उर-रहमान पर्रा ने “जम्मू-कश्मीर निवासी भूमि अधिकार और नियमितीकरण विधेयक, 2025” पेश किया। इस विधेयक के तहत PDP ने प्रस्ताव रखा कि जो लोग 20 वर्षों से अधिक समय से सरकारी या सार्वजनिक भूमि पर रह रहे हैं, उन्हें मालिकाना हक दिया जाए।

विपक्षी सदस्यों ने इसे गरीब वर्गों को राहत देने वाला कदम बताया, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे “अवैध कब्जों को वैध ठहराने की कोशिश” करार दिया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तीखा विरोध जताते हुए कहा कि “यह विधेयक राज्य की भूमि लूटने का रास्ता खोल देगा। किसी भी स्थिति में अवैध कब्जों को वैध नहीं ठहराया जा सकता।”

वहीं, PDP ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार आम नागरिकों के सिर से छत छीनना चाहती है। पर्रा ने कहा, “यह गरीबों और विस्थापितों का अधिकार है। जो लोग दशकों से इन ज़मीनों पर रह रहे हैं, उन्हें घर की कानूनी मान्यता मिलनी चाहिए।”

लंबी बहस के बाद सदन में विधेयक को आवाज़ मत से खारिज कर दिया गया।

AAP विधायक मेहराज मलिक की गिरफ्तारी पर हंगामा

विधानसभा में एक और बड़ा विवाद AAP के विधायक मेहराज मलिक की गिरफ्तारी को लेकर उठा। विपक्षी दलों ने उनकी हिरासत को “लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन” बताया और उनके सदन में शामिल होने की अनुमति की मांग की।

NC और PDP के विधायकों ने वेल में उतरकर नारेबाजी की। विपक्ष का कहना था कि “एक निर्वाचित प्रतिनिधि को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत हिरासत में रखना लोकतंत्र के खिलाफ है।”

सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि “यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए इस पर सदन में चर्चा उचित नहीं।”

अध्यक्ष अब्दुल रहीम राठर को कई बार सदन में व्यवस्था बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।

विपक्ष का पलटवार

विपक्षी दलों ने सरकार पर संवेदनशील मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। PDP ने कहा कि “सरकार नागरिक अधिकारों की बात करने वालों को चुप कराने की कोशिश कर रही है।” वहीं NC ने कहा कि “विधानसभा बहस का मंच है, अगर यहां भी जनता के प्रतिनिधि नहीं बोल पाएंगे तो फिर लोकतंत्र का क्या अर्थ रह जाएगा?”

सरकार की सफाई

राज्य सरकार ने भूमि विधेयक को लेकर साफ किया कि “कोई भी नीति तभी लाई जाएगी जब यह सुनिश्चित हो कि संबंधित व्यक्ति वैध निवासी हैं और इससे कानून-व्यवस्था पर असर नहीं पड़ेगा।”
सरकार ने साथ ही कहा कि AAP विधायक की गिरफ्तारी पूरी तरह कानून के दायरे में है और अदालत के फैसले का सम्मान किया जाएगा।

मंगलवार का सत्र इस बात का संकेत था कि जम्मू-कश्मीर की राजनीति में भूमि अधिकार और नागरिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में और ज्यादा राजनीतिक रंग लेंगे। विपक्ष इसे जनहित का मामला बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे प्रशासनिक अनुशासन का विषय मान रहा है।

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