JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मंगलवार को विशेष दर्जे और राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव को लेकर एक बार फिर जमकर हंगामा हुआ। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के विधायक आमने-सामने आ गए। भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष पर ऐसे प्रस्ताव पर चर्चा कराने का आरोप लगाया, जिसे पार्टी ने असंवैधानिक बताया।
भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने स्पीकर से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के पहले दिए गए बयान का हवाला देते हुए कहा कि संबंधित अधिकारियों की ओर से स्पीकर को प्रस्ताव को लेकर पहले ही पत्र के माध्यम से जानकारी दी गई थी।
स्पीकर के खिलाफ भाजपा का विरोध
सुनील शर्मा के आरोपों के बाद सदन में हंगामा बढ़ गया। भाजपा विधायकों ने स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठाए और उनके इस्तीफे की मांग की। इस दौरान भाजपा विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया और श्यामलाल शर्मा की भी विधानसभा अध्यक्ष के साथ तीखी बहस हुई।
बहस के दौरान स्पीकर ने विधायकों को सदन की कार्यवाही में व्यवधान न डालने और अपनी सीटों पर बैठने के लिए कहा। इसके बाद भाजपा और एनसी विधायकों के बीच नारेबाजी शुरू हो गई।
सरकार की विश्वसनीयता पर भी सवाल
बहस के दौरान बलवंत सिंह मनकोटिया ने सरकार की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए। वहीं, एनसी विधायकों ने भाजपा के आरोपों का विरोध किया। भारी नारेबाजी के बीच एनसी विधायक हिलाल अकबर लोन अपनी सीट से उठकर आगे आ गए।
स्थिति को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यों को शांत कराने की कोशिश की और कहा कि सभी अपनी सीटों पर बैठें।
फारूक अब्दुल्ला को लेकर भी विवाद
सदन में बहस के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस और भाजपा के बीच एक और मुद्दे पर तीखी नोकझोंक हुई। एनसी विधायक शौकत अहमद गनाई ने भाजपा विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया से डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर जेकेएलएफ का संस्थापक होने संबंधी कथित आरोप को लेकर माफी मांगने की मांग की।
इस मुद्दे ने भी सदन के माहौल को गर्म कर दिया और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर देखने को मिला।
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने भाजपा पर साधा निशाना
हंगामे के बीच उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने भाजपा पर विधानसभा की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।
सुरिंदर चौधरी ने विशेष दर्जे और राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति देने के लिए विधानसभा अध्यक्ष का आभार जताया। उन्होंने कहा कि विधानसभा जम्मू-कश्मीर की जनता की ओर से चुना गया मंच है और यहां जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए।
उपमुख्यमंत्री ने भाजपा से सवाल किया कि यदि पार्टी विशेष दर्जे की बहाली के पक्ष में नहीं है तो उसे सदन में अपना पक्ष रखना चाहिए।
रहबर-ए-खेल कर्मचारियों का मुद्दा भी उठा
सुरिंदर चौधरी ने भाजपा नेता सुनील शर्मा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने खेल मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल का जिक्र करते हुए पूछा कि रहबर-ए-खेल कर्मचारियों को नियमित करने के लिए उस समय क्या कदम उठाए गए।
उन्होंने परिहार बंधुओं की हत्या के मामले का भी उल्लेख करते हुए सवाल किया कि इस मामले की सच्चाई अब तक सामने क्यों नहीं आई।
राज्य का दर्जा और विशेष दर्जा बना बड़ा मुद्दा
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पिछले कई दिनों से राज्य का दर्जा बहाल करने और विशेष दर्जे से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं। इसी को लेकर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार राजनीतिक मतभेद सामने आ रहे हैं।
मंगलवार की कार्यवाही में भी यह मुद्दा हंगामे का प्रमुख कारण बना। भाजपा ने प्रस्ताव की संवैधानिक स्थिति पर सवाल उठाए, जबकि सरकार और सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने प्रस्ताव पर चर्चा को सदन का अधिकार बताया।
फिलहाल विधानसभा की कार्यवाही के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और नारेबाजी ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर विधानसभा के भीतर राजनीतिक मतभेदों को सामने ला दिया है।



