श्रीनगर। मंगलवार का विधानसभा सत्र साल का सबसे हलचलभरा दिन साबित होने वाला है। सदन में कुल 41 विधेयक पुर:स्थापित करने के लिए पेश होंगे, जिनमें से कई ऐसे हैं जो सीधे तौर पर जनता, कर्मचारियों और युवाओं के जीवन से जुड़े हैं।
आरक्षण अधिनियम 2004 की बहाली से लेकर लाल चौक पर शराबबंदी, सरकारी कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा अनिवार्यता और आतंकवाद पीड़ित परिवारों को नौकरी देने तक — सदन में “संविधान से लेकर संवेदना तक” का हर मुद्दा उठने जा रहा है।
आरक्षण अधिनियम 2004 फिर सुर्खियों में
विधानसभा में मंगलवार को सबसे ज्यादा नज़रें आरक्षण अधिनियम 2004 पर टिकेंगी।
डॉ. सैयद बशीर अहमद वीरी इस विधेयक को सदन में पुर:स्थापित करने की अनुमति मांगेंगे। यह विधेयक सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के अधिकारों से जुड़ा है।
सूत्रों के अनुसार, विपक्ष इस पर सरकार से “स्पष्ट नीति और समयबद्ध क्रियान्वयन” की मांग करने वाला है।
लाल चौक पर शराब बिक्री पर रोक का प्रस्ताव
विधायक अली मोहम्मद सागर श्रीनगर के लाल चौक क्षेत्र में शराब की बिक्री को पूरी तरह प्रतिबंधित करने का विधेयक पेश करेंगे।
यह प्रस्ताव धार्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। विपक्ष के कुछ सदस्यों ने पहले ही संकेत दिए हैं कि वे इसे “सांस्कृतिक और नैतिक सुधार” की दिशा में कदम बताएंगे, जबकि कुछ सदस्य “अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर असर” को लेकर सवाल उठा सकते हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है — “लाल चौक में लाल बत्ती बंद, अब शराब की बोतल भी सील होगी!”
सरकारी कर्मचारियों के बच्चों की सरकारी स्कूलों में पढ़ाई अनिवार्य करने का बिल
विधायक शेख खुर्शीद अहमद एक दिलचस्प और बहुचर्चित विधेयक लेकर आ रहे हैं — जिसके तहत सरकारी कर्मचारियों और लोकसेवकों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य किया जाएगा।
इस प्रस्ताव ने पहले ही सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। समर्थकों का कहना है कि “जब अफसर खुद सरकारी स्कूलों में अपने बच्चे भेजेंगे, तभी शिक्षा व्यवस्था सुधरेगी।”
विपक्ष का तर्क है कि यह “लोकप्रिय लेकिन व्यावहारिक रूप से असंभव” प्रस्ताव है।
आतंकवादी और शत्रु कार्रवाई के पीड़ितों के लिए अनुकंपा नौकरी
विधायक पवन कुमार गुप्ता आतंकवादी हमलों या शत्रु कार्रवाई में मारे गए सरकारी कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और नागरिकों के परिजनों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने वाला विधेयक पुर:स्थापित करेंगे।
यह प्रस्ताव कश्मीर घाटी और सीमा इलाकों में शहीद परिवारों की भावनाओं से सीधे जुड़ा हुआ है। सदन में इस पर भावनात्मक माहौल बनने के आसार हैं।
नशे पर प्रहार: व्यसन मुक्ति विधेयक
विधायक तनवीर सादिक ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग, उपचार, पुनर्वास और समाधान के लिए नया विधेयक प्रस्तुत किया है। इसमें “हर जिले में पुनर्वास केंद्र” और “व्यसन उपचार सुविधा” का प्रस्ताव रखा गया है।
सदन में इस पर सभी दलों का एकमत होना लगभग तय माना जा रहा है, क्योंकि युवाओं में बढ़ते नशे की समस्या को लेकर हर पक्ष चिंतित है।
संविदा कर्मचारियों और दैनिक वेतन भोगियों की सुरक्षा
विधायक मीर सैफुल्लाह दो अहम विधेयक लेकर आए हैं —
- संविदा व आकस्मिक मजदूरों की आजीविका की सुरक्षा के लिए कानून।
- गरीब बच्चों को कृषि विश्वविद्यालयों, पैरामेडिकल कॉलेजों और कौशल संस्थानों में शिक्षा सुनिश्चित करने का प्रस्ताव।
इन प्रस्तावों को “जन-संवेदना से जुड़ा एजेंडा” बताया जा रहा है।
भ्रष्टाचार पर लगाम — लोकायुक्त विधेयक फिर चर्चा में
एम.वाई. तारिगामी ने लोकसेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए लोकायुक्त की स्थापना विधेयक प्रस्तुत किया है।
यह प्रस्ताव सत्ता और विपक्ष, दोनों को असहज करने वाला माना जा रहा है। एक विधायक ने हंसते हुए कहा, “लोकायुक्त बने तो सबसे पहले शिकायतें सदन के भीतर से ही आएंगी।”
कुल मिलाकर मंगलवार का सत्र रहेगा ‘विधेयक वॉर’
41 विधेयकों की बौछार के बीच सरकार और विपक्ष दोनों के पास एक-दूसरे को चौंकाने का पूरा मौका रहेगा।
कहीं सामाजिक न्याय की बात होगी, कहीं नैतिकता की, कहीं प्रशासनिक जवाबदेही की —
और बीच-बीच में राजनीतिक ताने और तालियां इस सत्र को यादगार बना देंगे।

