JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल | जम्मू
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बुधवार को विधायकों के वेतन और भत्तों में प्रस्तावित बढ़ोतरी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेशनल कॉन्फ्रेंस और भाजपा के विधायक आमने-सामने आ गए। मुद्दा धीरे-धीरे विधायकों के वेतन से आगे बढ़कर कर्मचारियों और आम लोगों की लंबित मांगों तक पहुंच गया।
स्पीकर के आसन ग्रहण करते ही नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक अल्ताफ अहमद वानी उर्फ अल्ताफ कालू अपनी सीट से खड़े हुए। उन्होंने कुछ कागज लहराते हुए दावा किया कि इन दस्तावेजों पर भाजपा के विधायकों ने विधायकों के वेतन में बढ़ोतरी के प्रस्ताव के समर्थन में हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने भाजपा पर इस मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
अल्ताफ कालू की टिप्पणी के बाद भाजपा विधायक भी अपनी सीटों पर खड़े हो गए। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया। भाजपा विधायक शाम लाल शर्मा ने सत्ता पक्ष के सदस्यों को इस मुद्दे पर सदन के भीतर राजनीति नहीं करने की सलाह दी।
‘बिल रिजेक्ट नहीं, सरकार ने वापस लिया’
शाम लाल शर्मा ने कहा कि सरकार ने बिल को रिजेक्ट नहीं किया, बल्कि उसे वापस लिया है। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस और तेज हो गई। उन्होंने कहा कि सदन में जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए।
शर्मा ने विधायकों के वेतन बढ़ाने के बजाय आम लोगों और कर्मचारियों की समस्याओं पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने डेलीवेजरों की तनख्वाह और नियमितीकरण जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया।
‘पहले आम आदमी के मसले हल हों’
विपक्ष की ओर से कहा गया कि सरकार को पहले आम जनता की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। डेलीवेजरों की लंबित मांगों और नियमितीकरण जैसे मामलों का समाधान किए बिना विधायकों के वेतन में बढ़ोतरी का प्रस्ताव उचित नहीं है, ऐसा भाजपा विधायकों ने सदन में कहा।
इसके जवाब में अल्ताफ अहमद वानी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि पहले वेतन बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन किया गया और अब जनता के बीच अपनी छवि बनाए रखने के लिए इसका विरोध किया जा रहा है।
‘वेतन के लिए आए हैं तो प्राइवेट जॉब करो’
बहस के दौरान भाजपा विधायक शाम लाल शर्मा की एक टिप्पणी ने सदन का माहौल और गर्म कर दिया। उन्होंने अंग्रेजी में कहा, “If you are here for pay, do another private job.” यानी अगर कोई यहां वेतन-भत्तों के लिए आया है तो उसे कोई दूसरा निजी काम करना चाहिए।
शर्मा ने सदन में यह भी कहा कि विधायक लोगों की सेवा और उनका प्रतिनिधित्व करने के लिए चुने गए हैं। उनकी इस टिप्पणी के बाद सत्ता पक्ष और विपक्षी बेंचों के बीच फिर तीखी बहस शुरू हो गई।
वेतन का मुद्दा कर्मचारियों की मांगों तक पहुंचा
विधायकों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते कर्मचारियों की लंबित मांगों और डेलीवेजरों के नियमितीकरण के मुद्दे में बदल गया। दोनों पक्षों के विधायक अपनी-अपनी बात रखते नजर आए।
लगातार बढ़ते हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने दोनों पक्षों को शांत कराया और सदन की कार्यवाही को प्रश्नकाल की ओर आगे बढ़ाया। बुधवार की कार्यवाही में विधायकों के वेतन का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा।



