JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू
जम्मू-कश्मीर में मेडिकल इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब और तेज हो गया है। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और डेंटल कॉलेजों में इंटर्नशिप कर रहे MBBS और BDS इंटर्न ने सोमवार से भूख हड़ताल शुरू कर दी है। प्रदर्शन कर रहे इंटर्न का कहना है कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत और आश्वासन के बावजूद अभी तक उनकी मांग के संबंध में कोई लिखित और आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।
मेडिकल इंटर्न लंबे समय से अपने मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में उन्हें करीब ₹12,300 प्रति माह स्टाइपेंड मिल रहा है, जिसे बढ़ाकर ₹30,000 प्रति माह करने की मांग की जा रही है। इंटर्न का कहना है कि वर्ष 2019 के बाद से स्टाइपेंड में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि इस दौरान महंगाई और रोजमर्रा के खर्च में काफी वृद्धि हुई है।
सात दिन के प्रदर्शन के बाद भूख हड़ताल
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर मेडिकल इंटर्न पिछले सात दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। बातचीत के बावजूद जब उनकी मांग को लेकर कोई औपचारिक आदेश सामने नहीं आया तो आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए भूख हड़ताल का फैसला लिया गया।
सोमवार को बेमिना स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) मेडिकल कॉलेज के MBBS 2021 बैच के इंटर्न भी भूख हड़ताल पर बैठ गए।
‘लिखित आदेश मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा’
प्रदर्शन कर रहे इंटर्न का कहना है कि उन्हें केवल मौखिक आश्वासन नहीं चाहिए, बल्कि सरकार की ओर से स्पष्ट और लिखित आदेश चाहिए। उनका कहना है कि जब तक स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को मंजूरी देने वाला आधिकारिक आदेश जारी नहीं होता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
इंटर्न के मुताबिक, उनका संघर्ष केवल स्टाइपेंड बढ़ाने का मुद्दा नहीं है, बल्कि उनके काम, जिम्मेदारियों और सेवाओं के अनुरूप उचित सम्मान और मुआवजे का भी सवाल है।
10 मेडिकल कॉलेज और 2 डेंटल कॉलेज के इंटर्न आंदोलन में
मेडिकल इंटर्न के अनुसार जम्मू-कश्मीर के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों और 2 डेंटल कॉलेजों के इंटर्न इस आंदोलन से जुड़े हैं। उनका कहना है कि इंटर्नशिप के दौरान वे अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए उनके स्टाइपेंड को मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार बढ़ाया जाना चाहिए।
इंटर्न ने सरकार और संबंधित अधिकारियों से मामले में जल्द हस्तक्षेप करते हुए लिखित आदेश जारी करने की अपील की है। उनका कहना है कि वे बातचीत के पक्ष में हैं, लेकिन अब केवल आश्वासनों के आधार पर आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।
मेडिकल इंटर्न ने स्पष्ट किया है कि जब तक ₹30,000 स्टाइपेंड को लेकर आधिकारिक लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।



