JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू
राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार सुबह जम्मू समेत देश के कई हिस्सों में एक साथ बड़ी कार्रवाई शुरू की। इस कार्रवाई के तहत जम्मू में कारोबारी राकेश चौधरी से जुड़े परिसरों पर ED की टीम ने तलाशी अभियान चलाया।
जानकारी के अनुसार, ED की यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की जा रही है। जांच एजेंसी की टीमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और कोलकाता सहित विभिन्न स्थानों पर पहुंचीं।
फर्जी टोल रसीदें बनाने का आरोप
जांच का केंद्र NHAI के विभिन्न टोल प्लाजा पर कथित तौर पर किए गए फर्जी टोल संग्रह से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर अनधिकृत सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन का इस्तेमाल करके फर्जी या अनधिकृत टोल रसीदें तैयार की गईं।
जांच एजेंसी को आशंका है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से एकत्र की गई धनराशि NHAI की आधिकारिक लेखा प्रणाली से बाहर भेजी गई। ED इसी कथित धन के प्रवाह और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
गांधी नगर स्थित आवास पर पहुंची टीम
बुधवार सुबह करीब नौ बजे ED की टीम केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ जम्मू के गांधी नगर स्थित ग्रीन बेल्ट इलाके में राकेश चौधरी के आवास पर पहुंची। टीम ने परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया और तलाशी प्रक्रिया शुरू की।
कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों ने आवास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी। किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को परिसर के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
त्रिकुटा नगर स्थित कार्यालय में भी जांच
राकेश चौधरी का त्रिकुटा नगर में कार्यालय भी बताया गया है। यहां भी ED की टीम द्वारा रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है।
तलाशी के दौरान जांच एजेंसी दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों, कंप्यूटर रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री को खंगाल रही है। इन सामग्रियों के आधार पर कथित वित्तीय लेनदेन और धन के प्रवाह से जुड़ी कड़ियों की जांच की जा रही है।
कई राज्यों में एक साथ कार्रवाई
ED की यह कार्रवाई केवल जम्मू तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसी की टीमें देश के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ तलाशी अभियान चला रही हैं। इससे संकेत मिलता है कि जांच का दायरा कई राज्यों में फैले टोल संग्रह और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन तक पहुंच सकता है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित तौर पर अनधिकृत सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया, फर्जी टोल रसीदों के जरिए कितनी धनराशि एकत्र हुई और उस धनराशि को किस तरह आगे भेजा गया।
तलाशी पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी तस्वीर
फिलहाल ED की कार्रवाई जारी रहने की सूचना है। तलाशी पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जांच एजेंसी को किन दस्तावेजों या डिजिटल साक्ष्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है और क्या कोई सामान या रिकॉर्ड जब्त किया गया है।
राकेश चौधरी की कंपनी जम्मू-कश्मीर के अलावा देश के विभिन्न राज्यों में टोल प्लाजा पर टोल वसूली के ठेके लेने का काम करती है। ऐसे में ED की जांच में कंपनी के टोल संचालन, वित्तीय लेनदेन और संबंधित रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
फिलहाल इस पूरे मामले में ED की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। तलाशी अभियान पूरा होने और जांच आगे बढ़ने के बाद ही कथित फर्जीवाड़े की पूरी तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।



