JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू
जम्मू के अंबफला इलाके में डोगरा वीर योद्धा मियां डिडो की प्रतिमा एक बार फिर चर्चा में है। प्रतिमा से तलवार, कमर पर लगी बेल्ट और कंधे पर बना बाज दिखाई नहीं दे रहा है। प्रतिमा की मौजूदा स्थिति ने स्थानीय लोगों में नाराजगी पैदा कर दी है और ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक मियां डिडो की प्रतिमा जम्मू की डोगरा विरासत और वीरता का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। ऐसे में प्रतिमा के महत्वपूर्ण हिस्सों का गायब होना सामान्य घटना नहीं माना जा सकता। लोगों ने पूरे मामले की जांच करवाकर यह पता लगाने की मांग की है कि प्रतिमा के इन हिस्सों को कब और कैसे हटाया गया।
पार्क की हालत भी बनी चिंता का कारण
प्रतिमा के आसपास बने पार्क की स्थिति भी स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। पार्क में जगह-जगह गंदगी दिखाई देती है। इसके अलावा खाली बीयर की बोतलें पड़ी होने और फव्वारे व लाइटें बंद रहने की शिकायत भी सामने आई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर ऐतिहासिक प्रतिमा और उसके आसपास के क्षेत्र की नियमित निगरानी और देखभाल होती तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। लोगों ने पार्क की साफ-सफाई, लाइटिंग और सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है।
2017 में भी हुई थी प्रतिमा से तोड़फोड़
मियां डिडो की प्रतिमा को लेकर यह पहला विवाद नहीं है। इससे पहले वर्ष 2017 में भी अंबफला क्षेत्र में प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ का मामला सामने आया था। उस मामले में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। घटना के बाद प्रतिमा की सुरक्षा बढ़ाने और सीसीटीवी कैमरे लगाने का आश्वासन दिया गया था।
अब कई साल बाद प्रतिमा से तलवार, बेल्ट और बाज के गायब होने की बात सामने आने के बाद एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
लोगों ने की जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से पूरे मामले की जांच करवाने की मांग की है। साथ ही यह भी मांग की गई है कि अगर प्रतिमा के हिस्से जानबूझकर हटाए गए हैं तो जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
लोगों का कहना है कि जम्मू की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत केवल एक प्रतिमा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पहचान और इतिहास का हिस्सा है। इसलिए ऐसी धरोहरों की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर प्रशासन को गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत है।
फिलहाल प्रतिमा के हिस्से कब और किन परिस्थितियों में गायब हुए, इसकी आधिकारिक पुष्टि और जिम्मेदारी तय होना बाकी है।



