JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू
जम्मू शहर की हवा स्वच्छता के मानकों से अभी भी काफी दूर है। शहर का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) करीब 140 दर्ज किया गया है, जिसे संवेदनशील श्रेणी में रखा जाता है। यह स्तर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए विशेष रूप से नुकसानदायक माना जाता है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 रिपोर्ट में जम्मू को देशभर में 20वां स्थान मिला है। हालांकि पिछले साल के मुकाबले यह थोड़ा सुधार है, क्योंकि 2025 में जम्मू 22वें स्थान पर था। यह सर्वे 2011 की जनगणना के आधार पर शहरों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर किया जाता है, और जम्मू तीन से दस लाख आबादी वाले शहरों की श्रेणी में शामिल है।
रैंकिंग कैसे तय होती है
शहरों की रैंकिंग स्थानीय निकायों की स्वयं मूल्यांकन रिपोर्ट और एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग कमेटी के आकलन पर आधारित होती है। इसमें कचरा जलाना, सड़कों की धूल, निर्माण मलबा, वाहनों का धुआं और औद्योगिक प्रदूषण जैसे आठ सेक्टर शामिल किए जाते हैं।
प्रदूषण बढ़ने की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार जम्मू में जारी बड़े निर्माण प्रोजेक्ट प्रदूषण की मुख्य वजह हैं। इनमें एक्सप्रेस-वे निर्माण, कुंजवानी-सतवारी फ्लाईओवर, भगवती नगर फ्लाईओवर और स्मार्ट सिटी परियोजना के काम शामिल हैं। इन निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और सड़कों पर पड़ी निर्माण सामग्री PM10 का स्तर बढ़ा रही है। दूसरी बड़ी वजह ठोस कचरा प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) से जुड़ी परियोजना का अधूरा होना है।
प्रदूषण नियंत्रण समिति के वैज्ञानिकों का कहना है कि औद्योगिक और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर काफी हद तक काबू पाया जा चुका है, लेकिन निर्माण कार्यों के चलते PM10 की मात्रा बढ़ने से रैंकिंग प्रभावित हुई है। जैसे ही ये प्रोजेक्ट पूरे होंगे, जम्मू की रैंकिंग में सुधार की उम्मीद है।
सर्दियों में बढ़ सकती है परेशानी
विशेषज्ञों की मानें तो सर्दियों में कोहरे और धुंध के कारण धूल कण जमीन के नजदीक रह जाते हैं, जिससे PM10 का स्तर और बढ़ जाता है। ऐसे में आने वाले सर्दी के मौसम में जम्मू में वायु प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो सकती है।
PM10 क्या है और क्यों खतरनाक है
PM10 हवा में मौजूद वे कण हैं जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं और इनमें धूल, कालिख, धातु व अन्य हानिकारक रसायन शामिल हो सकते हैं। इनके संपर्क में आने से खांसी, घरघराहट, अस्थमा जैसी सांस संबंधी बीमारियां हो सकती हैं और हृदय रोग का खतरा भी बढ़ सकता है। अस्थमा या ब्रोंकाइटिस के मरीजों के लिए यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।



