JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल | जम्मू
प्रेम संबंध में दरार आने और शादी से इन्कार करने मात्र से किसी व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला साबित नहीं किया जा सकता। जम्मू की फास्ट ट्रैक अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह अहम टिप्पणी करते हुए 25 वर्षीय आरोपी सलीम खान को जमानत दे दी। आरोपी पर एक महिला को शादी का भरोसा देकर शारीरिक संबंध बनाने और उससे 12 लाख रुपये लेने का आरोप था।
आरोपी सलीम खान राजौरी जिले के थानामंडी क्षेत्र के मान्याल गांव का निवासी है। उसके खिलाफ जम्मू के पीर मिट्ठा पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता महिला राजस्व विभाग में पटवारी के पद पर कार्यरत है।
शादी का वादा कर 12 लाख रुपये लेने का आरोप
महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि सलीम खान ने उससे शादी करने का वादा किया और इसी भरोसे के आधार पर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। महिला के अनुसार, आरोपी ने कारोबार शुरू करने के नाम पर उससे 12 लाख रुपये भी लिए थे। बाद में उसने शादी करने से इन्कार कर दिया और पैसे वापस लौटाने से भी मना कर दिया। शिकायतकर्ता ने आरोपी पर उसे बदनाम करने की धमकी देने का आरोप भी लगाया था।
आरोपी ने आरोपों को बताया गलत
दूसरी ओर, आरोपी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए अदालत में अपना पक्ष रखा। उसका कहना था कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से बने थे और विवाद की असली वजह कारोबारी साझेदारी से जुड़ा पैसों का लेनदेन है।
अदालत ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई करते हुए पीठासीन अधिकारी अमरजीत सिंह लंगेह ने कहा कि दोनों के बीच वर्ष 2023 से संबंध थे। केवल प्रेम संबंध समाप्त होने या शादी नहीं होने के आधार पर धोखाधड़ी का अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी वित्तीय लेनदेन में धोखाधड़ी साबित करने के लिए यह दिखाना जरूरी है कि शुरुआत से ही आरोपी की मंशा धोखा देने की थी।
अदालत ने आरोपी को 30 हजार रुपये के जमानती मुचलके पर जमानत प्रदान कर दी। साथ ही उसे जांच में सहयोग करने और मामले के गवाहों को प्रभावित नहीं करने की शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए।
अदालत की इस टिप्पणी से स्पष्ट होता है कि प्रेम संबंध टूटने और आपसी आर्थिक विवाद को सीधे धोखाधड़ी का अपराध नहीं माना जा सकता। इसके लिए मामले के तथ्यों और शुरुआत से रही मंशा की जांच जरूरी है।


