JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल | जम्मू
जम्मू में कुंजवानी-गांधी नगर फ्लाईओवर के निर्माण के लिए सतवारी चौक और नई बस्ती की 39 दुकानें ध्वस्त कर दी गई हैं। प्रशासन की कार्रवाई के बाद जहां फ्लाईओवर निर्माण का रास्ता साफ हुआ है, वहीं इन दुकानदारों के सामने अपनी रोजी-रोटी चलाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित दुकानदारों का कहना है कि वे विकास कार्य के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनकी मांग थी कि पहले उन्हें दूसरी जगह दुकानें उपलब्ध करवाई जाएं और उसके बाद पुरानी दुकानों को हटाया जाए।
पिछले करीब दो वर्षों से पुनर्वास की मांग को लेकर दुकानदार प्रशासन के सामने अपनी बात रखते रहे। सरकार की ओर से गोल गुजराल के गोल क्षेत्र में वंडरलैंड पार्क के पास जमीन भी चिन्हित की गई। दुकानदारों को उम्मीद थी कि यहां नई दुकानें तैयार होने के बाद उन्हें आवंटित कर दिया जाएगा और वे अपना कारोबार दोबारा शुरू कर सकेंगे। लेकिन नई दुकानें तैयार होने से पहले ही पुरानी दुकानें हटा दी गईं।
अब दुकानदारों का सीधा सवाल है कि नई दुकानें बनने तक उनके परिवारों का खर्च कैसे चलेगा?
पहले पुनर्वास की मांग, फिर कार्रवाई
दुकानदारों का कहना है कि उन्हें पहले से मालूम था कि फ्लाईओवर परियोजना के लिए उनकी दुकानें हटाई जानी हैं। उनका विरोध फ्लाईओवर या विकास परियोजना को लेकर नहीं था। उनकी मांग केवल यह थी कि उन्हें दुकान के बदले दुकान दी जाए, ताकि उनका कारोबार और परिवार की आय का साधन बना रहे।
प्रशासन की ओर से बुधवार को बिजली कनेक्शन काटने के साथ दुकानदारों को दुकानें खाली करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद अधिकांश दुकानदारों ने अपना सामान बाहर निकाल लिया। सतवारी चौक पर कई दुकानें कार्रवाई से पहले ही खाली कर दी गई थीं।
इसके बाद हुई कार्रवाई में कुल 39 दुकानों को हटाया गया, जिससे प्रभावित दुकानदारों के सामने तत्काल रोजगार का संकट पैदा हो गया है।
‘अगले छह महीने परिवार कैसे चलेगा?’
नई बस्ती स्थित बिग सुपर साइकिल स्टोर के मालिक गुरमीत सिंह का कहना है कि प्रशासन की ओर से कहा जा रहा है कि नई दुकानें तैयार करने में चार से छह महीने लग सकते हैं। लेकिन उनका सवाल है कि इन छह महीनों में उनका परिवार कैसे चलेगा।
उनका कहना है कि दुकानदारों ने कभी विकास कार्य रोकने की मांग नहीं की। वे सिर्फ इतना चाहते थे कि पुरानी दुकान हटाने से पहले नई दुकान उपलब्ध करवाई जाए।
उनके अनुसार, आज दुकान बंद हो गई है तो आय का साधन भी बंद हो गया। ऐसे में नई दुकान बनने तक परिवार का खर्च चलाना सबसे बड़ी चिंता है।
‘हमें पता था दुकान हटेगी, लेकिन पुनर्वास भी तो चाहिए था’
नई बस्ती स्थित डीके रैना साइकिल वर्कस के मालिक दिनेश रैना का कहना है कि पिछले दो वर्षों से उन्हें पता था कि फ्लाईओवर निर्माण के कारण उनकी दुकान हटाई जानी है। इसके बावजूद उनकी मांग लगातार यही रही कि पहले पुनर्वास किया जाए।
उनका कहना है कि सरकार ने गोल गुजराल क्षेत्र में दुकानें उपलब्ध करवाने की बात कही थी, लेकिन अभी तक वहां न तो दुकानें तैयार हुईं और न ही उन्हें आवंटित किया गया।
दुकानदारों के मुताबिक, दुकान टूटने के बाद सबसे बड़ी चिंता यह है कि परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें कैसे पूरी होंगी।
छह महीने से सिर्फ वादे का आरोप
नई बस्ती बाजार एसोसिएशन के प्रधान नवीन गुप्ता समेत प्रभावित दुकानदारों का आरोप है कि पिछले करीब छह महीनों से उन्हें नई दुकानें देने की बात कही जा रही है, लेकिन अभी तक किसी दुकानदार को स्पष्ट आवंटन पत्र नहीं दिया गया।
दुकानदारों का कहना है कि उन्हें यह बताया जाना चाहिए कि नई दुकानें कब तक तैयार होंगी, किसे कौन सी दुकान मिलेगी और तब तक उनके कारोबार के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी।
उनका कहना है कि सिर्फ भविष्य में दुकानें देने का आश्वासन उनकी वर्तमान समस्या का समाधान नहीं है।
पूर्व पार्षद ने प्रशासन पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप
प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में नई बस्ती पहुंचे पूर्व पार्षद पवन सिंह ने प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि दुकानदारों को सामान निकालने के लिए पर्याप्त समय देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन जिस तरह कार्रवाई हुई, उससे प्रभावित परिवारों की परेशानी बढ़ गई।
उन्होंने कहा कि सरकार नई दुकानें बनाने का खर्च उठाने की बात कर रही है, लेकिन जब तक दुकानें तैयार नहीं होतीं, तब तक दुकानदार अपने परिवारों का पालन-पोषण कैसे करेंगे, इसका भी समाधान होना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापारी विकास के विरोधी नहीं हैं। उनकी मांग है कि विकास के साथ प्रभावित लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
अस्थायी दुकानों की भी उठी मांग
चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री जम्मू के पूर्व वरिष्ठ उपप्रधान दीपक अग्रवाल ने कहा कि विकास परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था पहले होनी चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जब तक गोल क्षेत्र में नई दुकानें तैयार नहीं होतीं, तब तक प्रभावित दुकानदारों को अस्थायी तौर पर दुकानें उपलब्ध करवाई जाएं।
उन्होंने डोगरा चौक स्थित जम्मू हाट का भी सुझाव दिया, जहां कुछ दुकानें बंद पड़ी होने की बात कही गई। उनका कहना है कि इन दुकानों का अस्थायी इस्तेमाल प्रभावित व्यापारियों के लिए किया जा सकता है, ताकि उनका कारोबार पूरी तरह बंद न हो।
फ्लाईओवर से जाम से राहत की उम्मीद
सतवारी-कुंजवानी मार्ग पर बन रहा एलिवेटेड फ्लाईओवर जम्मू की महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल है। इस मार्ग पर लंबे समय से यातायात दबाव और जाम की समस्या बनी हुई है।
परियोजना पूरी होने के बाद सतवारी, बिक्रम चौक और कुंजवानी के बीच यातायात को बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ जम्मू हवाई अड्डे और माता वैष्णो देवी की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
लेकिन परियोजना के साथ विस्थापित हुए दुकानदारों की अपनी चिंता है। उनका कहना है कि फ्लाईओवर बनने से शहर को जाम से राहत मिलेगी, लेकिन जब तक उन्हें नई दुकानें नहीं मिलतीं, तब तक उनके परिवारों की रोजी-रोटी का क्या होगा?
अब नई दुकानों के निर्माण और आवंटन का इंतजार
पुरानी दुकानें हट चुकी हैं और फ्लाईओवर निर्माण के लिए रास्ता साफ हो गया है। अब प्रभावित 39 दुकानदारों की निगाह गोल क्षेत्र में प्रस्तावित नई दुकानों पर है।
दुकानदार चाहते हैं कि प्रशासन नई दुकानों के निर्माण और आवंटन की स्पष्ट समयसीमा बताए। साथ ही उनका कहना है कि जब तक स्थायी दुकानें तैयार नहीं होतीं, तब तक अस्थायी कारोबार की व्यवस्था की जाए।
दुकानदारों का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं। वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि विकास की कीमत उनकी रोजी-रोटी न बने।



