JNM पत्रकार हरदीप जमवाल,जम्मू
जम्मू-कश्मीर में एक ओर नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर रही है, वहीं दूसरी ओर कश्मीरी हिंदू संगठन पनुन कश्मीर ने भी अपने लंबे समय से लंबित मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का फैसला किया है। संगठन ने घोषणा की है कि 20 जुलाई को देशभर से विस्थापित कश्मीरी हिंदू दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक दिवसीय धरना देकर घाटी में उनके लिए एक अलग सुरक्षित केंद्र शासित क्षेत्र (यूटी) बनाए जाने की मांग करेंगे।
यह प्रदर्शन ऐसे समय में होने जा रहा है जब नेशनल कॉन्फ्रेंस भी उसी दिन दिल्ली में राज्य का दर्जा बहाल करने के समर्थन में बड़ा प्रदर्शन आयोजित करने जा रही है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर की राजनीति में दो अलग-अलग मांगें आमने-सामने दिखाई दे रही हैं।
जम्मू में हुई बैठक, आंदोलन की रणनीति तैयार
धरने की तैयारी को लेकर जम्मू में पनुन कश्मीर संगठन की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संगठन के प्रधान टीटू गंजू ने की। बैठक में बी.एल. कौल, कुलदीप रैना, एम.के. धर सहित कई वरिष्ठ सदस्यों ने भाग लिया और 20 जुलाई के आंदोलन की रूपरेखा तैयार की।
बैठक में निर्णय लिया गया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में जम्मू, दिल्ली और देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे विस्थापित कश्मीरी हिंदू बड़ी संख्या में शामिल होंगे।
“पहले पुनर्वास और सुरक्षा, फिर स्टेटहुड”
संगठन का कहना है कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने से पहले कश्मीरी हिंदुओं के सुरक्षित और सम्मानजनक पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। पनुन कश्मीर का मानना है कि घाटी में उनके लिए एक ऐसा सुरक्षित क्षेत्र बनाया जाए जो हमेशा केंद्र सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में रहे, ताकि भविष्य में उनकी सुरक्षा और अधिकारों से कोई समझौता न हो।
संगठन के नेताओं का कहना है कि वर्ष 1990 में हुए पलायन के बाद से हजारों परिवार अपने ही देश में विस्थापित जीवन जी रहे हैं। उनका तर्क है कि जब तक उन्हें संवैधानिक और प्रशासनिक सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक घाटी में सम्मानजनक वापसी संभव नहीं है।
तीन दशक पुरानी मांग फिर चर्चा में
पनुन कश्मीर संगठन वर्ष 1991 से कश्मीरी हिंदुओं के लिए अलग सुरक्षित क्षेत्र की मांग करता आ रहा है। संगठन का कहना है कि यह केवल जमीन का नहीं, बल्कि सुरक्षा, पहचान और सम्मानजनक पुनर्वास का मुद्दा है। उनका मानना है कि यदि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाता है और पूरी प्रशासनिक व्यवस्था स्थानीय सरकार के अधीन चली जाती है, तो विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
20 जुलाई को दिल्ली में जुटेंगे देशभर के विस्थापित
संगठन ने बताया कि जंतर-मंतर पर होने वाले धरने में देश के विभिन्न राज्यों से कश्मीरी हिंदू शामिल होंगे। प्रदर्शन के माध्यम से केंद्र सरकार से मांग की जाएगी कि जम्मू-कश्मीर के भविष्य से जुड़ा कोई भी बड़ा राजनीतिक फैसला लेने से पहले विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं के पुनर्वास और सुरक्षा के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
20 जुलाई को एक तरफ नेशनल कॉन्फ्रेंस राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन करेगी, जबकि दूसरी ओर पनुन कश्मीर अलग सुरक्षित केंद्र शासित क्षेत्र की मांग उठाएगा। ऐसे में दोनों अलग-अलग मुद्दों के एक ही दिन राष्ट्रीय राजधानी में उठने से जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नई बहस छिड़ने की संभावना है।
हालांकि, इन मांगों पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही लिया जा सकता है। फिलहाल 20 जुलाई का दिन जम्मू-कश्मीर से जुड़े दो प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों के कारण विशेष महत्व का माना जा रहा है।


