JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू
जम्मू-कश्मीर सरकार ने लंबे समय तक बिना अनुमति सरकारी ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने राजपोरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात मेडिकल ऑफिसर डॉ. मोहम्मद अजहर-उद-दीन की सरकारी सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इस संबंध में विभाग की ओर से 11 सितंबर 2026 को आदेश जारी किया गया।
सरकारी आदेश के अनुसार, डॉ. मोहम्मद अजहर-उद-दीन ने 6 जनवरी 2024 को मुंबई के एलटीएमसी मेडिकल कॉलेज एवं सायन अस्पताल में डीएम नियोनेटोलॉजी पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था। हालांकि, इस पाठ्यक्रम में शामिल होने से पहले उन्होंने सक्षम अधिकारी से आवश्यक अनुमति या अवकाश की औपचारिक मंजूरी नहीं ली थी।
डॉक्टर ने उच्च शिक्षा के लिए अनुमति लेने के उद्देश्य से उचित माध्यम से आवेदन जरूर किया था, लेकिन आवेदन पर अंतिम फैसला आने से पहले ही उन्होंने पाठ्यक्रम में प्रवेश ले लिया और अपनी सरकारी ड्यूटी से अनुपस्थित हो गए।
आवेदन किया, लेकिन अनुमति नहीं मिली
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अनुसार, सरकारी सेवा में कार्यरत डॉक्टरों के लिए उच्च शिक्षा या किसी पाठ्यक्रम में शामिल होने से पहले सक्षम प्राधिकारी की अनुमति लेना जरूरी है। मार्च 2024 में प्रशासनिक विभाग ने डॉक्टर के आवेदन को निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी नहीं होने के आधार पर खारिज कर दिया था।
इसके बावजूद डॉ. अजहर-उद-दीन ने डीएम नियोनेटोलॉजी का पाठ्यक्रम जारी रखा और राजपोरा स्थित स्वास्थ्य केंद्र में अपनी ड्यूटी पर वापस नहीं लौटे।
सरकार ने पहले भी दिए थे नोटिस
लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के मामले में सरकार ने डॉक्टर को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया था। 24 मार्च 2025 को जारी नोटिस में उनसे उनकी अनुपस्थिति को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया और ड्यूटी पर वापस लौटने के निर्देश दिए गए।
इसके बाद 5 मार्च 2026 को डॉक्टर को अंतिम नोटिस जारी किया गया। इसमें स्पष्ट किया गया कि यदि वह निर्देशों का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टर ने दी थी यह दलील
अपने जवाब में डॉक्टर ने विभाग को बताया कि उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए अनुमति लेने के लिए उचित माध्यम से आवेदन किया था। उन्होंने यह भी कहा कि निर्धारित पांच वर्ष की सेवा अवधि पूरी करने में केवल कुछ दिनों की कमी थी और उन्हें उम्मीद थी कि बाद में उन्हें अनुमति मिल जाएगी।
डॉक्टर ने विभाग के सामने यह भी पक्ष रखा कि डीएम नियोनेटोलॉजी जैसी विशेषज्ञता जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। उन्होंने अपनी अनुपस्थिति की अवधि को अध्ययन अवकाश, असाधारण अवकाश या नियमों के तहत उपलब्ध किसी अन्य अवकाश के रूप में नियमित करने का अनुरोध किया।
डॉक्टर ने यह इच्छा भी जताई थी कि पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद वह दोबारा सरकारी सेवा में लौटना चाहते हैं।
सरकार ने आवेदन को अनुमति के बराबर नहीं माना
विभाग ने डॉक्टर की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी द्वारा अनुमति के लिए आवेदन करना और सक्षम अधिकारी से अनुमति प्राप्त होना दो अलग-अलग बातें हैं।
विभाग के मुताबिक, जब तक सक्षम प्राधिकारी से औपचारिक मंजूरी नहीं मिलती, तब तक सरकारी तैनाती स्थल से अनुपस्थित रहना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
सरकार ने जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा अवकाश नियम, 1979 के नियम 13 और सिविल सेवा विनियम के अनुच्छेद 128 का हवाला देते हुए अनधिकृत अनुपस्थिति को कदाचार की श्रेणी में माना।
सेवा रिकॉर्ड, जारी किए गए नोटिस, डॉक्टर की ओर से दिए गए जवाब और कानूनी राय की समीक्षा के बाद विभाग ने उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया। इसके बाद सरकार ने डॉ. मोहम्मद अजहर-उद-दीन की सेवाएं 6 जनवरी 2024 से प्रभावी रूप से समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया।


