JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल | जम्मू
लद्दाख को उसकी जमीन, रोजगार, संस्कृति, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए विशेष संवैधानिक संरक्षण देने की दिशा में केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है। लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने बताया कि लद्दाख की विशेष परिस्थितियों और लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत एक नए ढांचे पर काम किया जा रहा है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत संविधान के अनुच्छेद 371 में लद्दाख के लिए एक नया अध्याय जोड़ने की बात सामने आई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य लद्दाख की जमीन, स्थानीय लोगों के रोजगार, संस्कृति, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान करना है।
मुख्य सचिव के अनुसार लद्दाख के लिए तैयार किया जा रहा यह मॉडल देश के अन्य हिस्सों में लागू व्यवस्थाओं से अलग होगा। इसमें लद्दाख की स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की जरूरतों को विशेष महत्व दिया जाएगा।
अक्टूबर में प्रस्ताव पर होगी चर्चा
लद्दाख के मुख्य सचिव ने बताया कि अक्टूबर के पहले सप्ताह में गृह मंत्रालय और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली अगली बैठक में प्रस्तावित ढांचे पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इस बैठक में अब तक हुई बातचीत से सामने आए सुझावों और प्रस्तावित व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा की जरूरत को लेकर सहमति है। इस सुरक्षा के दायरे में जमीन, रोजगार, संस्कृति, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों को शामिल किया जाना जरूरी है।
सीधे चुने जाने वाले निकाय का भी प्रस्ताव
केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत में लद्दाख के लिए एक केंद्र शासित प्रदेश स्तर के निकाय के गठन का सुझाव भी सामने आया है। प्रस्ताव के अनुसार इस निकाय के लिए सीधे चुनाव कराने की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है।
हालांकि, इस निकाय को कितनी शक्तियां दी जाएंगी, उसके अधिकार क्या होंगे और मौजूदा पर्वतीय विकास परिषदों के साथ उसका संबंध किस प्रकार रहेगा, इन विषयों पर अभी आगे चर्चा होनी है।
जमीन और रोजगार की सुरक्षा पर विशेष जोर
लद्दाख में लंबे समय से स्थानीय लोगों की जमीन, रोजगार और सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठते रहे हैं। प्रस्तावित संवैधानिक व्यवस्था में इन्हीं विषयों को प्रमुखता दिए जाने की बात कही जा रही है।
इसके अलावा पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लद्दाख की भौगोलिक परिस्थितियों और बढ़ते पर्यटन को देखते हुए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का मुद्दा भी बातचीत का अहम हिस्सा बना हुआ है।
संविधान में संशोधन की प्रक्रिया पर भी विचार
मुख्य सचिव के अनुसार प्रस्तावित ढांचे पर सहमति बनने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसमें संसद के माध्यम से संविधान में आवश्यक संशोधन किए जाने पर भी विचार होगा।
इसके बाद प्रस्तावित निकाय की शक्तियों, जिम्मेदारियों और संस्थागत व्यवस्था को स्पष्ट करने के लिए अलग कानून की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि, अंतिम व्यवस्था बातचीत और सहमति बनने के बाद ही स्पष्ट होगी।
लद्दाख में पर्यटन में भी बढ़ोतरी
मुख्य सचिव ने लद्दाख में पर्यटन से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। उनके अनुसार इस वर्ष अब तक लद्दाख में चार लाख से अधिक पर्यटक पहुंच चुके हैं। वहीं, पूरे वर्ष 2025 में करीब तीन लाख 35 हजार पर्यटक लद्दाख पहुंचे थे।
बढ़ते पर्यटन के बीच पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संसाधनों के संतुलित उपयोग को लेकर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई जा रही है।
फिलहाल लद्दाख को विशेष संवैधानिक सुरक्षा देने के प्रस्ताव पर केंद्र और लद्दाख के बीच बातचीत जारी है। अक्टूबर के पहले सप्ताह में होने वाली अगली बैठक को इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैठक में प्रस्तावित संवैधानिक ढांचे और लद्दाख के लिए बनने वाली नई व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर आगे चर्चा होगी।



