JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल | जम्मू
जम्मू-कश्मीर में बाहरी राज्यों से आने वाले श्रमिकों की पहचान और दस्तावेजों के सत्यापन के लिए चलाए जा रहे पुलिस अभियान के दौरान 300 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान हुई है। पुलिस ने इन लोगों के खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की है। अब तक करीब 150 लोगों को वापस भेजे जाने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, जबकि 150 अन्य लोगों को भी वापस भेजने की प्रक्रिया प्रस्तावित है।
दरअसल, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बाहरी राज्यों से आने वाले श्रमिकों का रिकॉर्ड तैयार करने और उनकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए पंजीकरण अभियान शुरू किया था। इसके तहत श्रमिकों के पहचान पत्र, स्थायी पते और रोजगार से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही थी। इसी सत्यापन के दौरान कुछ लोगों के दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां सामने आईं।
जांच के दौरान कुछ लोगों के आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों को लेकर संदेह पैदा हुआ। इसके बाद पुलिस और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों ने उनकी पहचान और नागरिकता की गहन जांच की। जांच में इन लोगों के बांग्लादेशी नागरिक होने की पुष्टि हुई।
नागरिकता की पुष्टि के बाद शुरू हुई कार्रवाई
बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान होने के बाद संबंधित रिकॉर्ड और नागरिकता से जुड़ी जानकारी बांग्लादेशी अधिकारियों के साथ साझा की गई। नागरिकता की पुष्टि के बाद भारतीय कानून के तहत इनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
पुलिस के अनुसार, पकड़े गए लोगों को निर्धारित केंद्रों में रखा गया और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें भारत से वापस भेजने की प्रक्रिया अपनाई गई।
एक जत्थे को भारतीय वायुसेना के विशेष विमान के माध्यम से पश्चिम बंगाल के बागडोगरा पहुंचाया गया। वहां आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें बांग्लादेशी अधिकारियों को सौंपा गया।
इसके अलावा सात अक्टूबर को करीब 150 और बांग्लादेशी नागरिकों को बागडोगरा ले जाने की प्रक्रिया प्रस्तावित बताई गई है।
श्रमिकों की सुरक्षा के लिए शुरू हुआ था अभियान
पुलिस का यह अभियान केवल दस्तावेजों की जांच तक सीमित नहीं है। जम्मू-कश्मीर में अलग-अलग राज्यों से रोजगार के लिए आने वाले श्रमिकों की सुरक्षा भी इसका एक प्रमुख उद्देश्य है।
पिछले कुछ वर्षों में आतंकवादी संगठनों ने बाहरी राज्यों से जम्मू-कश्मीर में काम करने आए श्रमिकों को निशाना बनाया है। पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के श्रमिक आतंकवादी हमलों का शिकार हो चुके हैं।
इसी पृष्ठभूमि में पुलिस ने श्रमिक बस्तियों और उनके कार्यस्थलों पर निगरानी बढ़ाई है। मकान मालिकों, ठेकेदारों और नियोक्ताओं से भी श्रमिकों की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा जा रहा है।
संवेदनशील इलाकों में बढ़ाई गई निगरानी
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त, नाकाबंदी और खुफिया गतिविधियों को तेज किया है। श्रमिकों के पंजीकरण और दस्तावेजों के सत्यापन के साथ ऐसे विदेशी नागरिकों की भी पहचान की जा रही है, जो अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर जम्मू-कश्मीर में रह रहे हो सकते हैं।
सुरक्षा एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि ऐसे लोग जम्मू-कश्मीर तक किन रास्तों से पहुंचे और स्थानीय स्तर पर उनके संपर्क किन लोगों से रहे हैं।
समिति के रिकॉर्ड में भी सामने आया था आंकड़ा
जम्मू-कश्मीर में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को लेकर पहले भी चिंता जताई जाती रही है। केंद्र की जनसांख्यिकीय बदलावों से संबंधित उच्च स्तरीय समिति के जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान स्थानीय संगठनों ने भी बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की मौजूदगी का मुद्दा उठाया था।
समिति के समक्ष रखे गए रिकॉर्ड के अनुसार जम्मू-कश्मीर में 504 बांग्लादेशी नागरिक दर्ज किए गए थे। इनमें 46 जम्मू और 458 कश्मीर क्षेत्र में पाए जाने की जानकारी दी गई थी।
पुलिस के मौजूदा सत्यापन अभियान में कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में 300 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान सामने आना सुरक्षा और दस्तावेज सत्यापन व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, किसी व्यक्ति की नागरिकता को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक सत्यापन के आधार पर ही तय किया जाता है।



