JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल | जम्मू
जम्मू-कश्मीर में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और उनके संचालन को लेकर सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार के साथ स्थानीय युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से सरकार ने जम्मू-कश्मीर निजी विश्वविद्यालय नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। इन नए नियमों के तहत प्रदेश में स्थापित होने वाले निजी विश्वविद्यालयों में स्थानीय डोमिसाइल धारकों के लिए दाखिलों और नौकरियों में न्यूनतम 25 प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य किया गया है।
सरकार की ओर से लागू किए गए इन नियमों को जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब निजी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करने के साथ-साथ रोजगार हासिल करने के अवसरों में भी स्थानीय युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। नए प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक शैक्षणिक कार्यक्रम की स्वीकृत छात्र संख्या में कम से कम 25 प्रतिशत सीटें जम्मू-कश्मीर के डोमिसाइल धारकों के लिए आरक्षित रहेंगी। इसी तरह विश्वविद्यालयों में शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों पर होने वाली नियुक्तियों में भी न्यूनतम 25 प्रतिशत पद स्थानीय उम्मीदवारों के लिए निर्धारित किए गए हैं।
दाखिले में स्थानीय विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
नए नियमों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा निजी विश्वविद्यालयों में स्थानीय विद्यार्थियों के लिए निर्धारित आरक्षण है। इसके तहत विश्वविद्यालयों के प्रत्येक पाठ्यक्रम में स्वीकृत सीटों का कम से कम एक चौथाई हिस्सा जम्मू-कश्मीर के डोमिसाइल प्रमाणपत्र धारकों के लिए रखा जाएगा। इससे प्रदेश के उन विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जो उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों में जाने के बजाय जम्मू-कश्मीर में ही बेहतर संस्थानों में पढ़ाई करना चाहते हैं।
आरक्षित सीटों और पदों का श्रेणीवार वितरण जम्मू-कश्मीर आरक्षण अधिनियम, 2004, आरक्षण नियम, 2005 और डोमिसाइल प्रमाणपत्र जारी करने से संबंधित नियम, 2020 के साथ समय-समय पर जारी सरकारी निर्देशों के अनुसार किया जाएगा। हालांकि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी यदि डोमिसाइल कोटे की सीटें खाली रह जाती हैं तो उन्हें अन्य पात्र उम्मीदवारों से योग्यता के आधार पर भरा जा सकेगा।
नौकरियों में भी स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता
सरकार ने केवल दाखिलों तक ही स्थानीय युवाओं के हितों को सीमित नहीं रखा है। नए नियमों के अनुसार निजी विश्वविद्यालयों में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के स्वीकृत पदों में कम से कम 25 प्रतिशत नियुक्तियां जम्मू-कश्मीर के डोमिसाइल धारकों में से करनी होंगी।
इस प्रावधान से प्रदेश के शिक्षित युवाओं को निजी विश्वविद्यालयों में शिक्षक, प्रशासनिक कर्मचारी और अन्य पदों पर रोजगार पाने के अवसर मिल सकते हैं। खासकर उन युवाओं को इसका लाभ मिलने की संभावना है, जो उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद प्रदेश में ही रोजगार की तलाश कर रहे हैं।
निजी विश्वविद्यालयों की मंजूरी के लिए तय होगी समयसीमा
नए नियमों में निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने की प्रक्रिया को भी व्यवस्थित और समयबद्ध बनाया गया है। किसी संस्था की ओर से निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए आवेदन किए जाने के बाद सरकार 30 दिनों के भीतर उसकी प्रारंभिक जांच करेगी। इस दौरान संस्था की पात्रता और कानूनी शर्तों के अनुपालन को परखा जाएगा।
यदि आवेदन में कोई कमी पाई जाती है तो संबंधित संस्था को एक समेकित कमी-पत्र जारी कर निर्धारित समय में कमियां दूर करने का अवसर दिया जाएगा। यदि संस्था निर्धारित समय में कमियां दूर नहीं करती है तो उसका आवेदन आगे विचार किए बिना खारिज किया जा सकता है।
इसके बाद प्रस्ताव को विशेषज्ञ समिति के पास भेजा जाएगा। समिति संबंधित संस्था की पात्रता, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, वित्तीय क्षमता, दस्तावेजों और प्रस्तावित विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे की जांच करेगी। जरूरत पड़ने पर समिति प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण भी कर सकेगी और संबंधित विषयों के विशेषज्ञों की राय ले सकेगी।
विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए सैद्धांतिक मंजूरी, शर्तों के साथ मंजूरी या प्रस्ताव को खारिज करने का निर्णय ले सकेगी। समिति की सिफारिशें प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर उच्च शिक्षा मंत्री को उचित निर्णय लेना होगा।
मंजूरी मिलने से पहले शुरू नहीं होंगे दाखिले
नए नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए जारी किया जाने वाला लेटर ऑफ इंटेंट अपने आप में विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान नहीं करेगा। यह पत्र एक वर्ष तक वैध रहेगा। विशेष परिस्थितियों में लिखित कारण दर्ज करते हुए इसकी अवधि अधिकतम छह महीने तक बढ़ाई जा सकती है।
संबंधित संस्था को निर्धारित शर्तें और आवश्यक मंजूरियां पूरी करनी होंगी। इसके बिना वह विद्यार्थियों के दाखिले शुरू नहीं कर सकेगी और न ही शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित करने या डिग्रियां प्रदान करने की हकदार होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य बिना पूरी मान्यता और आवश्यक सुविधाओं के विश्वविद्यालय चलाने वाली संस्थाओं पर रोक लगाना है।
निजी विश्वविद्यालयों की निगरानी के लिए बनेगा प्राधिकरण
प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए निजी विश्वविद्यालय नियामक प्राधिकरण गठित करने का प्रावधान भी किया गया है। इसकी अध्यक्षता ऐसे सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी करेंगे, जिन्होंने सरकार में आयुक्त सचिव के पद पर या उससे ऊपर काम किया हो और जिन्हें उच्च शिक्षा प्रशासन, सार्वजनिक नीति या नियामक व्यवस्था का अनुभव हो।
इस प्राधिकरण में उच्च शिक्षा, वित्त और कानून विभागों के प्रशासनिक सचिव, सरकारी विश्वविद्यालय के एक कुलपति, दो प्रतिष्ठित शिक्षाविद और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संयुक्त सचिव स्तर से नीचे नहीं होने वाले प्रतिनिधि को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान या प्रतिष्ठित शोध संस्थान से एक शिक्षाविद तथा उद्योग, सार्वजनिक नीति और संस्थागत प्रशासन से जुड़े प्रतिनिधियों को भी स्थान दिया जाएगा।
प्राधिकरण निजी विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता, बुनियादी ढांचे, प्रशासनिक व्यवस्था और निर्धारित मानकों के अनुपालन की निगरानी करेगा। इसके लिए संस्थानों का निरीक्षण करने और नियमों के उल्लंघन की जांच करने का अधिकार भी होगा।
नियमों का उल्लंघन करने पर लगेगा भारी जुर्माना
सरकार ने निजी विश्वविद्यालयों की मनमानी रोकने के लिए आर्थिक दंड के कड़े प्रावधान भी किए हैं। नए नियमों के अनुसार अधिनियम की धारा 47 का उल्लंघन कर दाखिले देने पर विद्यार्थियों से वसूली गई वास्तविक फीस का दोगुना जुर्माना लगाया जा सकेगा। निर्धारित सीमा से अधिक फीस वसूलने पर अतिरिक्त वसूली गई राशि का तीन गुना दंड देना होगा।
इसी तरह अयोग्य शिक्षक की नियुक्ति करने पर प्रत्येक शिक्षक के लिए 20 हजार रुपये प्रतिमाह जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यदि विश्वविद्यालय में निर्धारित संख्या से कम शिक्षक नियुक्त किए जाते हैं तो प्रत्येक कमी पर भी 20 हजार रुपये प्रतिमाह जुर्माना लगेगा। तीन महीने बाद यह जुर्माना दोगुना हो जाएगा।
परीक्षा और उचित मूल्यांकन के बिना डिग्री, डिप्लोमा या प्रमाणपत्र जारी करने पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकेगा। बुनियादी ढांचे में निर्धारित मानकों की कमी पाए जाने पर दो लाख रुपये प्रतिमाह और सरकार तथा नियामक प्राधिकरण की पूर्व अनुमति के बिना दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम या विस्तार केंद्र शुरू करने पर 5.5 लाख रुपये प्रतिमाह जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
उमर अब्दुल्ला ने शिक्षा मंत्री को दी बधाई
जम्मू-कश्मीर निजी विश्वविद्यालय नियम, 2026 अधिसूचित होने पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शिक्षा मंत्री शमीमा फिरदौस को बधाई दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से साझा किए गए बयान में उन्होंने इसे प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों को आकर्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
मुख्यमंत्री के अनुसार नए नियमों से निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना की प्रक्रिया सरल होगी और स्थानीय डोमिसाइल धारकों को दाखिलों तथा रोजगार में 25 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली पर प्रभावी निगरानी भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
उन्होंने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित, चिकित्सा, कानून, व्यवसाय अध्ययन और उदार कला जैसे क्षेत्रों में नए शिक्षण संस्थानों की स्थापना को प्रोत्साहित करने की बात भी कही।
कुल मिलाकर जम्मू-कश्मीर निजी विश्वविद्यालय नियम, 2026 प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर पैदा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इन नियमों के जरिए सरकार निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ स्थानीय विद्यार्थियों के दाखिलों, युवाओं के रोजगार और विश्वविद्यालयों की जवाबदेही को एक ही नियामक ढांचे के तहत लाने का प्रयास कर रही है। अब इन प्रावधानों का वास्तविक लाभ प्रदेश के युवाओं तक किस हद तक पहुंचता है, यह इनके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।



