Monday, May 18, 2026
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अगर तय समय में स्टेटहुड नहीं मिला तो छोड़ दूंगा कुर्सी: उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान, केंद्र पर दबाव बढ़ाने की कोशिश?

JNM संवाददाता, श्रीनगर | 26 अक्टूबर
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रविवार को राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने स्टेटहुड बहाली के लिए एक निश्चित समयसीमा तय की है और अगर उस अवधि में यह बहाली नहीं होती, तो वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे।

एक टेलीविज़न साक्षात्कार में उमर अब्दुल्ला ने कहा — “हमने अपने स्तर पर एक समय सीमा तय की है। अगर उस अवधि तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं हुआ तो यह केंद्र की नाकामी होगी। मैं ऐसी कुर्सी पर बैठना नहीं चाहूंगा जहां जनता को न्याय न मिल सके।”

जब उनसे पूछा गया कि यह समयसीमा कितनी है, तो उमर ने मुस्कुराते हुए कहा — “यह मेरे और मेरे ऊपर वाले के बीच की बात है। जब वक्त आएगा तो जनता खुद जान जाएगी। मैं आपको ऐसी स्थिति में नहीं डालूंगा कि आप मेरे पीछे स्टॉपवॉच लेकर खड़े हों।”

पहले भी दे चुके हैं ऐसा बयान

यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री ने राज्य के दर्जे को लेकर सख्त रुख अपनाया हो। 24 जून को भी उन्होंने कहा था कि अगर स्टेटहुड बहाली के लिए विधानसभा भंग करनी पड़े तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि उमर अब्दुल्ला लगातार इस मुद्दे को जीवित रखकर जनता के बीच यह संदेश देना चाहते हैं कि उनकी सरकार जम्मू-कश्मीर की पहचान और अधिकारों की बहाली के लिए गंभीर है।

राज्यसभा चुनावों के बीच नया सियासी मोड़

मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में भाजपा को अप्रत्याशित बढ़त मिली। 28 सीटों के संख्याबल के बावजूद भाजपा उम्मीदवार को 32 वोट मिले, जबकि तीन वोटों को खारिज कर दिया गया। विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे “राजनीतिक सौदेबाजी” करार दिया है।
राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि उमर अब्दुल्ला का यह बयान केंद्र पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है ताकि “स्टेटहुड बहाली” का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय बहस में लौट आए।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना

उमर अब्दुल्ला लगातार अपने भाषणों और मीडिया बातचीत में राज्य के दर्जे को प्राथमिकता दे रहे हैं।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद से नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इसे अपनी राजनीतिक पहचान से जोड़ा हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उमर का “कुर्सी छोड़ने” वाला बयान जनता में अपनी प्रतिबद्धता दिखाने के साथ-साथ केंद्र को एक सियासी संदेश देने की कोशिश भी है — कि अब जम्मू-कश्मीर की जनता राज्य के दर्जे की बहाली को लेकर समझौता करने के मूड में नहीं है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का बयान स्पष्ट रूप से केंद्र पर दबाव डालने और राज्य का दर्जा बहाल कराने की कोशिश है। यह मुद्दा आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर की राजनीति में सबसे अहम बनेगा।

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